लॉकडाउन शुरू होने के बाद ही यहां वहां फंसे मजदूर पैदल ही अपने अपने घरों के लिये निकल गये। मजदूरों ने 2000-2000 किलोमीटर का सफर तय किया पैदल। कई घर तक पहुंचे और कुछ ने रास्ते में ही दम तोड दिया।

मिलन की हूक में चल बसा : मुंबई से 1600 KM पैदल पहुंचा श्रावस्ती, क्वारैंटाइन में 6 घंटे न बिता सका

New Delhi : घरवालों से मिलने की आस में एक युवक ने मुम्बई से उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के अपने गांव के लिये करीब 1600 किलोमीटर की यात्रा की। और फिर उसको गांव पहुंचकर भी घरवालों से मिलने नहीं दिया गया। क्वारैंटीन कर दिया गया। बस क्या था। उसके दिल में घरवालों से न मिल पाने की हूक घर कर गई और 1600 किलोमीटर की लंबी यात्रा कर लॉकडाउन की वीरानी को जीतनेवाले इस शख्स ने छह घंटे में ही हार मान ली और चल बसा। बहरहाल पुलिस और प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेजा है पर मुश्किल यह है कि उसके दिल में जो तमन्ना थी वो पोस्टमार्टम से भी जाहिर नहीं होगी।

मजदूरों का पलायन व्यापक पैमाने पर हुआ लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही। सभी अपनी गांव घर गये।

पता चला है कि प्रशासन ने उसे 14 दिनों के लिए गांव के ही एक स्कूल में क्वारैंटाइन कर दिया था। वहीं 6 घंटे में ही उसकी जान चली गई। श्रावस्ती जनपद के थाना मल्हीपुर क्षेत्र के मठखनवा गांव में सोमवार को महाराष्ट्र से पैदल चलकर चोरी-छिपे गांव पहुंचे युवक की जान चली गई। युवक को गांव के स्कूल में बने क्वारैंटाइन सेंटर में 14 दिनों के लिये रखा गया था लेकिन वह 14 दिन तो छोड़िये, 14 घंटे भी क्वारनटीन सेंटर में नहीं बिता पाया।
युवक सोमवार को सुबह 7 बजे महाराष्ट्र के मुंबई से करीब 1600 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने गांव पहुंचा था। दिन में करीब 1 बजे बात करते-करते उसकी मौत हो गई। क्वारैंटाइन सेंटर में युवक की मौत की खबर आग की तरह जिले में फैल गई जिससे जनपद में हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के आला अधिकारी आनन-फानन में गांव पहुंचे जहां पर कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उसके शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया। क्वारैंटाइन में युवक की मौत एक रहस्य बन गई जिसको सुलझाने में स्वास्थ्य और पुलिस महकमा लग गया है।

लॉकडाउन में भी अपने घरों को साइकिल से लौटते मजदूर

इधर उसके शव के पास पहुंचे परिवार के लोगों को उसी स्कूल में क्वारैंटाइन कर दिया गया है। मृतक के घरवालों का दावा है कि जिस तरह उसके शरीर की हालत थी, उससे यही लगता है कि उसे पैदल चलकर ही इतनी लंबी दूरी तय करके आना पड़ा होगा।

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