आज है जानकी नवमी, इसी दिन हल के नोक से प्रकट हुईं थीं मां जानकी

NEW DELHI : आज सीता नवमी है । हिन्दू धर्म में जिस प्रकार राम नवमी का महत्व है ठीक उसी प्रकार सीता नवमी का भी महत्व है । इसे जानकी नवमी के नाम से भी  जाना जाता है ।हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन श्रीराम की प्राणप्रिया पतिव्रताओं में शिरोमणि सीता उस समय प्रकट हुई थी जब मिथिला नरेश राजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे,  उसी समय उनकी हल भूमि में गाड़े गए घड़े से टकराई और बालिका के रुप मे सीता प्रकट हुईं । जोती हुई भूमि और हल के नोक को सीता कहा जाता है, इसके कारण  इस बालिका का नाम सीता रखा गया  । हिन्दू मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को प्रत्येक वर्ष इसे  मनाया जाता है, इसी कारण इसे सीता नवमी कहते हैं  ।

  विवाहित हिन्दू महिलाएं इस दिन अपने पतियों के लम्बी और सफल जीवन की कामना करती हैं । हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं इस दिन भगवान राम के साथ-साथ माता सीता की व्रत एवं पूजा अर्चना करती हैं ,उन्हें सारे रोगों एव जीवन के कष्टों से छुटकारा मिल जाती है। यही नहीं इससे परिवारिक कलेश भी दूर होती है । साथ ही साथ उन्हें किसी प्रसिद्ध तीर्थ स्थल का  भ्रमण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है ।

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इस दिन पूजा करने के लिए कुछ जरुरी बाते जिन्हें अपनाकर जानकी नवमी को सफल बनाया जा सकता है –

1.सीता नवमी के दिन शुद्ध चावल ,धूप ,दीप, लाल फूलों की माला ,गेंदा का फूल और शुद्ध मिष्ठान से माता सीता की पूजा-अर्चना करें । तिल के तेल या गाय की घी से दीया जलाएं और आसन पर बैठकर लाल चंदन की माला से ओम श्रीसीताये नम: मंत्र की जाप करें ।

2.इस दिन दोपहर के समय श्रीसीताराम जी को पीले फूलों की माला अर्पित करें ।पीले मिष्ठान का भोग लगाकर मिट्टी के दीए में कपूर रखकर आरती करें ।

3.आरती के बाद मिष्ठान को भोग लगाकर जरुरतमंद बच्चों और स्त्रियों में मिष्ठान का वितरण करें ।

4.इस दिन सुबह या शाम के समय लाल या पीले फूलों से भगवान श्री राम की पूजा अर्चना करें और एक नारियल पर कलावा लपेटकर पीले मिष्ठान के साथ श्री राम को अर्पण करें और उनके सामने जल का पात्र रखें ।

5.पाठ पूरा होने के बाद अपने घर में पूजा वाले जल का छिड़काव करें ।