देश’द्रोहियों से निपटने के लिए रा’जद्रोह क़ानून जरूरी है : केंद्र सरकार

New Delhi : बुधवार को केंद्र सरकार ने कहा राजद्रोह कानून को ख़त्म करने का कोई भी प्रस्ताव नहीं है। यह कानून की मदद से देशविरोधी गतिविधियों ,देशद्रोहियों ,अलगाववादियों और आतंकवादियों से निपटने में मदद करता है और वर्त्तमान में इस कानून की आवश्यकता भी है।

टीआरएस सांसद बंदा प्रकाश ने सरकार से पूछा था क्या सरकार राजद्रोह कानून को खत्म करने का विचार कर रही है। इस सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया अपराध से निपटने के लिए आईपीसी की धारा 124A, के प्रावधान को ख़त्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। दे’शद्रोही, अ’लगाववादी और आ’तंकवादी तत्वों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए इस प्रावधान को बनाए रखने की आवश्यकता है ”
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2019 लोकसभा चुनावों के लिए अपने घोषणा पत्र में कहा था कि उनकी सरकार आती है तो वह भारतीय दंड सहिंता की धारा 124 ए जिसे राजद्रोह कानून भी कहा जाता है को ख़त्म कर देगी। वर्त्तमान में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। जिस पर काफी बहस हुई थी भाजपा ने कांग्रेस इस कानून को लेकर भी हमला बोल था।

क्या है राजद्रोह कानून

लार्ड मैकाले द्वारा 1870 में भारतीय दंड सहिंता में की धारा 124 A के तहत राजद्रोह कानून को शामिल किया गया था। अगर किसी व्यक्ति,समूह द्वारा देश में अशांति फ़ैलाने , देश की संप्रभुता ,एकता और अखंडता को न’ष्ट करने की कोशिश करता है या किसी भाषण ,लेखन के माध्यम से सरकार की अवमानना या आलोचना करता है तो  इस कानून के तहत अगर दोषी पाया जाता है तो 3 साल से लेकर उ’म्रकैद तक की सजा दी जाती है। अभी हाल ही में कन्हैया कुमार ,हार्दिक पटेल पर रा’जद्रोह कानून के अंतर्गत ही गि’रफ्तार किया गया था।