222 साल बाद साऊदी अरब रद कर सकता है हज यात्रा

New Delhi : सऊदी अरब कोरोनावायरस की वजह से हज यात्रा 222 साल बाद रद्द कर सकता है। इससे पहले 1798 में ऐसा किया गया था। सउदी सरकार ने फरवरी के अंत में उमरा को बैन कर दिया था। उमरा भी हज की तरह ही होता है। निश्चित इस्लामी महीने में मक्का और मदीना की यात्रा को हज कहा जाता है। इस समय के अलावा सालभर में इन स्थानों की धार्मिक यात्रा उमरा कहलाती है। पिछले साल यहां हज यात्रा पर करीब 20 लाख लोग पहुंचे थे। यह सालाना इस्लामिक कार्यक्रमों का प्रमुख हिस्सा है। यही कारण है कि 1918 फैले फ्लू के दौरान भी इसे रद्द नहीं किया गया था। यहां अब तक दो हजार 39 लोग संक्रमित हैं, जबकि 25 की जान गई है।
हर मुस्लमान के लिए हज यात्रा बहुत अहम मानी गई है। इस्लाम के मुताबिक सबको ज़िंदगी में कम से कम एक बार हज ज़रूर करना चाहिए। तभी तो हर साल सऊदी अरब के मक्का में दुनियाभर के लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। इस्लाम के कुल पाँच स्तंभों में से हज पांचवां स्तंभ है। हज को अतीत के पापों को मिटाने के अवसर के तौर पर देखा जाता है। मान्यता है कि हज के बाद उसके तमाम पिछले गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं और वो अपनी ज़िंदगी को फिर से शुरू कर सकता है। ज़्यादातर के मन में जीवन में एक बार हज पर जाने की इच्छा होती है।
जो हज का ख़र्च नहीं उठा पाते हैं उनकी धार्मिक नेता और संगठन आर्थिक मदद करते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी ज़िंदगी भर की कमाई हज पर जाने के लिए बचाकर रखते हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों से ऐसे हाजी भी पहुंचते हैं जो हज़ारों मील की दूरी महीनों पैदल चलकर तय करते हैं और मक्का पहुंचते हैं।
इनके लिए इस्लाम के पाँच स्तंभ काफ़ी मायने रखते हैं। ये स्तंभ पाँच संकल्प की तरह हैं। इस्लाम के मुताबिक़ जीवन जीने के लिए ये काफ़ी अहम हैं। ये हैं इस्लाम के पांच स्तंभ : 1. तौहीद- यानी एक अल्लाह और मोहम्मद उनके भेजे हुए दूत हैं इसमें हर मुसलमान का विश्वास होना। 2, नमाज़- दिन में पाँच बार नियम से नमाज़ अदा करना। 3. रोज़ा- रमज़ान के दौरान उपवास रखना। 4, ज़कात- ग़रीबों और ज़रूरतमंद लोगों को दान करना। 5. हज- मक्का जाना।
यह इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी और इसी यात्रा में पैग़ंबर अब्राहम की धार्मिक परंपरा को फिर से स्थापित किया गया। सभी लोग यहां एहरम वस्त्र में आते हैं। यानी बिना सिलाई वाले सफेद कपड़े पहनते हैं। उनका सिर ढका होता है और महिलाएं भी किसी तरह का मेकअप और इत्र इस्तेमाल नहीं करतीं। ऐसा समानता के लिए किया जाता है ताकि यहां अमीरी और ग़रीबी का एहसास ना हो। हज की शुरुआत मक्का से होती है। कई लोग मक्का से पहले मदीना पहुंचते हैं जहां पैग़ंबर मोहम्मद की मज़ार है और यहीं पर उन्होंने पहली मस्जिद बनाई थी।

Corona Virus से दुनियाभर में अब तक 59 हजार 141 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोपियन देशों के लिये कोरोना नासूर बन गया है लेकिन सबसे गंभीर स्थिति अमेरिका की हो गई है। कोरोना अमेरिका के लिये नासूर बन गया है। यहां पिछले 24 घंटे में 1480 लोगों की मौत सिर्फ कोरोना से हुई है। एक दिन में कोरोना से संक्रमण के 32 हजार से ज्यादा मामले सामने आये हैं।
अमेरिका में अब तक 7 हजार 392 लोग जान गंवा चुके हैं। 2 लाख 77 हजार संक्रमित हैं। एक दिन में न्यूयॉर्क में 562 लोगों की जान गई। यानी हर ढाई मिनट में एक व्यक्ति की जान गई। यह एक दिन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। न्यूयार्क में सक्रमण के एक लाख से ज्यादा मामले हो गये हैं।
इधर अमेरिका में इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा – चुनाव अपने निर्धारित समय तीन नवंबर को ही होंगे। उन्होंने कहा कि वे मतदान के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले बैलट के समर्थन में नहीं हैं। मतदान पोलिंग बूथ में ही किया जाना चाहिए। हालांकि, कोरोना के कारण कई राज्यों ने चुनाव स्थगित कर दिए हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस महामारी के कारण जुलाई और अगस्त के बीच होने वाले नामांकन सम्मेलन को भी स्थगित कर दिया है।
व्हाइट हाउस में शुक्रवार को प्रेस ब्रिफिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा – सीडीसी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार नॉन-मेडिकल क्लॉथ (कपड़े) का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वह खुद मास्क नहीं पहनेंगे। सीडीसी की यह सिफारिशें हाल के रिसर्च पर आधारित है। ट्रम्प ने कहा कि सीडीसी मेडिकल ग्रेड या सर्जिकल ग्रेड मास्क के इस्तेमाल की सिफारिश नहीं कर रहा है। मेडिकल कर्मचारियों के लिए एन95 रेस्पिरेटर मास्क को बचाया जाना जरूरी है।
बहरहाल पूरी दुनिया में संक्रमितों की संख्या 10 लाख 98 हजार पहुंच गई है। दो लाख 28 हजार 405 व्यक्ति स्वस्थ भी हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने गुरुवार को एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि कोरोनावायरस के संक्रमण के पीछे चीन के मांस बजार का हाथ है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्लयूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से मांस बाजार के खिलाफ कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन का यह मार्केट दुनिया के अन्य देशों और लोगों के लिए गंभीर खतरा है।

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