लौटे श्रमिक : मेहमानों का स्वागत सेनिटाइजर छिड़ककर किया जाये…और फिर 21 दिन क्वारैंटाइन

New Delhi : लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे यूपी-बिहार और झारखंड के मजदूरों की घर वापसी शुरू हो गई है। श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मजदूरों को अपने-अपने राज्य में भेजने का जिम्मा रेलवे ने उठाया है। ट्रेनों से इन लोगों को भेजा जा रहा है। स्टेशन पर उतरने के साथ ही इनका स्वागत सेनिटाइजर छिड़ककर किया जा रहा है। इसके बाद सभी बस से अपने अपने शहर भेजे जा रहे हैं। अपने जिले में पहुंचने के बाद इन लोगों को घर नहीं जाने दिया जा रहा है। स्थानीय जिला प्रशासन इन्हें एक जगह पर 21 दिन के लिए क्वारंटाइन सेंटर पर रख रहा है। 21 दिन पूरे होने के बाद इनका स्वास्थ्य परीक्षण होगा। सब सही पाये जाने के बाद इन्हें घर जाने दिया जायेगा। मतलब अपने शहर पहुंचने के बाद भी इन लोगों को अपनों से मिलने में 21 दिन का इंतजार करना होगा।

बहरहाल आज नासिक से चलकर रविवार सुबह 5.54 बजे श्रमिक स्पेशल ट्रेन लखनऊ पहुंची। ट्रेन में 17 कोच लगाकर कुल 829 श्रमिक चारबाग स्टेशन लाये गए। यहां से परिवहन विभाग की 65 बसों की मदद से श्रमिकों को अलग अलग 27 जिलों की बसों में बैठाकर रवाना किया गया। इससे पहले स्पेशल ट्रेन में भी श्रमिकों को जिलेवार अलग अलग बिठा कर भेजा गया जबकि एक कोच में सम्मिलित जिलों के 30 श्रमिकों को एक साथ बैठे मिले। इन श्रमिकों के स्थान पता न होने के चलते इन्हें एक साथ भेजा गया जिसके चलते स्टेशन पर कोच को सबसे आखरी में खाली कराकर इसके श्रमिकों के स्थान का पता कर उन्हें बसों में बिठाया गया।
रेलवे श्रमिकों से सख्ती से सोशल डिस्टेंसिन्ग का पालन करवा रहा है। इसके बाद एक-एक यात्री की थर्मल स्क्रीनिंग कर उनका तापमान, नाम, पिता का नाम, पता व फ़ोन नंबर दर्ज किया जा रहा है। फिर लाइन में लगाकर श्रमिकों को बसों से गंतव्य स्थल के लिये भेजा जा रहा है। महाराष्ट्र के भिवंडी रोड से गोरखपुर 01901 श्रमिक स्पेशल ट्रेन बयाना, टूंडला, कानपुर के रास्ते होते हुए रविवार शाम 6 बजे चारबाग से गुजरेगी जबकि गुजरात के वसई रोड से गोरखपुर जाने वाली स्पेशल ट्रेन उक्त रास्ते से रात 10.05 बजे ऐशबाग के रास्ते गोरखपुर जायेगी।
वैसे स्पेशल ट्रेन से आने वाले श्रमिकों में अधिकांश श्रमिक खाने को लेकर शिकायत कर रहे हैं।

नासिक से लौटे श्रमिकों ने बताया कि उन्हें नासिक से दो पानी की बोतलें मिली थी लेकिन 17 घण्टे कोच में ही बैठे बैठे पानी खत्म हो गया। रास्ते में भुसावल और इटारसी में उन्हें खाने के पैकेट मिले लेकिन पानी नहीं मिला जिससे रास्ते मे पानी की समस्या खड़ी हो गयी। वहीं कोच में कहीं भी पानी न भरे जाने से कई कोच में पानी खत्म हो गया।

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