अयोध्या फैसले पर बोले सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज गांगुली- अल्पसंख्यकों के साथ हुआ है अन्याय

New Delhi: अयोध्या वि’वाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। कोर्ट ने वि’वादित जमीन पर रामलला के हक में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज ए के गांगुली ने राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र को जमीन देने के सु्प्रीम कोर्ट के फैसले के साथ असंतोष व्यक्त किया और कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय किया गया है।

जस्टिस एके गांगुली ने कहा, “मैं हैरान और परेशान हूं। संविधान हर एक को अधिकार देता है और उसे सभी को न्याय देना पड़ता है, लेकिन इस मामले में अल्पसंख्यकों को न्याय नहीं दिया गया है।”

गांगुली ने कहा, “यह निर्वि’वाद है और यह भी निर्वि’वाद है कि मस्जिद को ध्व’स्त किया गया था। यहां तक ​​कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह कानून के शासन का घोर उल्लं’घन है और ब’र्बरता का कार्य है। इस परिदृश्य में प्रश्न यह है कि किसके साथ अन्या’य हुआ है। यहां अल्पसंख्यकों के साथ अन्या’य हुआ है।”

अयोध्या वि’वाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का समर्थन नहीं करने वालों में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी थे जिन्होंने कहा था कि “सर्वोच्च न्यायालय सर्वोच्च है, लेकिन अचूक नहीं है”। ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की तरह हम भी इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने के कोर्ट के फैसले को यह कहकर मानने से मना कर दिया कि हम खैरात की जमीन नहीं ले सकते।

इसके अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी कोर्ट से सवाल पूछा कि बाबरी मस्जिद तो’ड़ने वालों को सजा मिल पाएगी? बता दें कि कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि 1934 और 1992 में मस्जिद क्ष’तिग्रस्त करना गैर- कानूनी था।

बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने शनिवार को इस मामले में फैसला सुनाया। 5 न्यायाधीशों की बेंच ने 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल थे। फैसले में कहा गया कि वि’वादित 2.77 एकड़ भूमि राम लल्ला को सौंप दी जाए और मंदिर निर्माण के लिए केंद्र को तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट स्थापित करने का निर्देश दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही अलग जगह देने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को दावे को भी खा’रिज कर दिया।

दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा सवाल- क्या बाबरी मस्जिद तो’ड़ने वालों को मिलेगी स’जा?