मरदू फ्लैट्स केस : अपना आशियाना बचाने के लिए निवासियों ने की भूख हड़ताल

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट द्वारा 400 फ्लैटों को ध्वस्त करने के आदेश के विरोध में मरदू फ्लैट्स के निवासी रविवार को भूख हड़ताल कर रहे हैं। मरदू हाउसिंग प्रोटेक्शन कमेटी के अध्यक्ष शमसुद्दीन करुनागपल्ली ने बताया फ़्लैट्स के निवासियों को अगले 4 दिनों में बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने इसका विरोध करते करते हुए कहा अभी तक फ्लैट खाली करने नहीं मिला बिना नोटिस के फ्लैट से बेदख़ल करना कैसे संभव है। उन्होंने बताया सभी फ्लैट निवासी उचित पुनर्वास और उचित समय की हमारी मांग पूरी होने तक भूख हड़ताल पर हैं।

आपको बता दें 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तटीय विनियमन क्षेत्र नियमों के उल्लंघन के लिए एर्नाकुलम जिले के मारुदु नगरपालिका में लगभग 400 फ्लैटों को ध्वस्त करने आदेश दिया है। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने यह आदेश भी दिया है कि प्रत्येक फ्लैट मालिक को 4 हफ्तों के भीतर भुगतान किया जाए। मुआवजे के रूप में 25 लाख रूपये की राशि का भुगतान करने का फैसला किया गया है। इस मामले की आगे की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 25 अक्टूबर की तारीख तय की है।

इसके साथ ही कोर्ट ने मुआवजे के मूल्यांकन के लिए एक समिति गठित की है। सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, तकनीकी विशेषज्ञों और एक सिविल इंजीनियरों की एक समिति फ्लैट मालिकों को देय मुआवजे का मूल्यांकन करेगी। बिल्डिंग को खड़ा करने के लिए जिम्मेदार लोगों से मुआवजे की राशि वसूली जाएगी।

राज्य सरकार ने इस संबंध में अदालत में एक हलफनामा दायर कर चुकी है। इस हलफनामे में कहा गया कि वि’ध्वंस प्रक्रिया 138 दिनों में पूरी की जाएगी। 90 दिन वि’ध्वंस के लिए लगेंगे जबकि बाकी दिनों में बचे हुए मलबे को हटाया जाएगा। समय पर प्रक्रिया शुरू करने का आदेश शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को दिया है।

शीर्ष अदालत ने उन बिल्डरों और प्रमोटरों की संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया है, जिन्होंने तटीय क्षेत्र में इमारतों का निर्माण किया था। जस्टिस अरुण मिश्रा और एस रवींद्र भट की बेंच ने यह सुनवाई की है। तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंड का उ’ल्लंघन करते हुए इन फ्लैट का कोच्चि में निर्माण किया गया था।