छतीसगढ़ ने दांडी-यात्रा का दामन थामा,पानी के लिए शुरू हुई जंग

New Delhi: पानी के लिए छतीसगढ़ के लोगों ने दांडी-यात्रा की राह अपनाते हुए ओड़िशा और मध्यप्रदेश सरकार के बीच बने समझौते को दी चुनौती

पानी की वजह से तीसरे विश्व युध्द की जंग छिड़ेगी, यह बात छतीसगढ़ में सही साबित हो रही है। छतीसगढ़ के बस्तर जिले में इंदरावती नदी के पानी को बचाने को लिए दांडी-यात्रा की शुरूआत हो चुकी है। पानी के बचाव के लिए जिले के लोगों ने आंदोलन की राह पकड़ ली है। 8 मई से भेजपदर गांव से इस यात्रा की शुरूआत की गई है।

लोग एक गांव से दूसरे गांव पैदल चल-चलकर इस आंदोलन में अपना सहयोग दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि गांवों में पानी का स्तर धरातल से काफी नीचे गिरता जा रहा है। छतीसगढ़ के लोगों को ओड़िशा और मध्यप्रदेश सरकार के बीच बने समझौते के अनुसार भी पानी मुहैया नहीं कराया जा रहा है। इस बात के विरोध में लोगों ने अपनी बात रखने का यह तरीका अपनाया है।

यात्रा के संयोजक किशोर पारेख और दशरथ राम कश्यप ने यात्रा में शामिल लोगों से यह कहते नजर आ रहे हैं कि नदी में आज जो पानी दिख रहा है वह एनीकट का है। नदी में प्राकृतिक रूप से बहाव बिल्कुल नहीं है, जबकि अभी आधी गर्मी बीती है और इंद्रावती की यह हालत है। हम सभी से निवेदन करते हैं कि वे अपने मित्रजनों को यह बतलाने की कोशिश करें कि उनकी इंद्रावती कितनी बदहाल है। इस यात्रा का नेतृत्व 87 वर्षीय डिमरापाल आश्रम के पद्मश्री धर्मपाल सैनी कर रहे हैं और उनका सहयोग आश्रम की बालिकाएं भी कर रहीं हैं। इंद्रावती नदी का

छतीसगढ़ की राजनीति में प्रभाव चार विधानसभा सीटों पर सीधे दिखता है। जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा और बीजापुर की राजनीति में इंद्रावती का सीधा दखल है। बस्तर लोकसभा सीट में भी इंद्रावती का पानी असर डालता है। इस आंदोलन से चुनाव के नतीजों के समीकरण पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।