लखनऊ का ऐसा मंदिर जहां साल में एक बार खुलते हैं द्वार, दशहरे पर होती है रावण की पूजा

New Delhi: आज दशहरे के अवसर पर जहां रावण को बुराई का प्रतीक मानकर सब उसका दहन करते हैं वहीं लखनऊ के एक मंदिर में रावण की इस दिन पूजा की जाती है। लोग राक्षस राजा रावण के दर्शन करने के लिए उनका आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं। मंदिर के द्वार साल में एक बार दशहरा के दिन ही खुलते हैं, रावण के दर्शन करने लोग दूर दूर से यहां आते हैं।

गुरु प्रसाद शुक्ल द्वारा 1890 के दशक में निर्मित मंदिर ‘दशानन मंदिर’ को दशहरा के दिन हर साल खोला जाता है। जो भक्त इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं उनका मानना है कि रावण एक ‘महान विद्वान’ हैं जो उनकी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एक स्थानीय ने कहा “हम हर साल रावण की प्रार्थना करने के लिए यहां आते हैं। हमारी प्रार्थना रावण को श्रद्धांजलि देने के बाद पूरी होती है,” । एक अन्य स्थानीय ने कहा, “यह मंदिर वर्ष में केवल एक बार दशहरा पर खुलता है। वह एक महान विद्वान थे। उनके भक्तों में से अधिकांश क्षत्रिय और ठाकुर समुदाय के हैं।”

इस दिन, रावण या दशानन की दस सिर वाली मूर्ति को रंगीन फूलों से सजाया जाता है और उसके बाद आरती की जाती है। इतना ही नहीं, मंदिर में आने वाले लोग तेल के दीपक जलाते हैं और मूर्ति के सामने मंत्रों का जाप करते हैं। रावण का पुतला जलाने के बाद, मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर से बंद कर दिए जाते हैं।

दशहरा (विजयादशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। दशहरे का उत्सव शक्ति और शक्ति का समन्वय बताने वाला उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है। इस दृष्टि से दशहरे अर्थात विजय के लिए प्रस्थान का उत्सव का उत्सव आवश्यक भी है।