भूख से जंग लड़ रहे 65 वर्षीय वृद्ध की मौत, चार दिन से था भूखा

New Delhi: देश ने इतनी तरक्की कर ली है की हम चांद पर तो पहुंच गए हैं पर देश में भूख से होने मौत को नहीं रोक पाएं हैं। देश में अभी भी भूख से लोग मर रहे हैं। झारखंड में रहने वाले 65 वर्षीय रामचरण मुंडा की मृत्यु भुखमरी के कारण हो गई और रामचरण को सरकारी आनाज इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि बायोमेट्रिक आधारित राशन डिलीवरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन काम नहीं कर रही थी।

हालाकि जिला प्रशासन ने इस तरह की किसी भी घटना से इंकार किया। एडीएम सुधीर कुमार ने आरोपों को खारिज कर दिया है।रामचरण की बेटी ने भूख से हुए अपने पिता के मौत पर कहा कि हमें पिछले 3 महीनों से राशन नहीं मिला है और उन्होंने पिछले 4 दिनों से कुछ नहीं खाया था।

जिला प्रशासन ने इस तरह की किसी भी घटना से इंकार किया और कहा कि मुंडा की शराब पीने की लत के कारण मौत हो गई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें दो दिन पहले ही अस्पताल से छुट्टी मिली थी। रामचरण मुंडा अपनी पत्नी और एक बेटी के साथ रहता था और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता था। उन्हें तीन महीने से राशन नहीं मिल रहा था।

इस घटना से पिछले साल दिल्ली में भूख से हुई तीन बच्चियों की मौत की घटना की याद ताजा हो गई। जुलाई में पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में कथित तौर पर भूख से तीन बच्चियों की मौत हुई थी। इनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भूख को मौत का कारण बताया गया था। मरने वाली बच्चियों की पहचान शिखा (8), मानसी (4) और 2 साल की पारुल के रूप में हुई थी। इस खबर ने दिल्ली समेत पूरे देश को हिला कर रख दिया था। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका भी दायर की गयी थी।