लोकसभा 2019: साल 1996 से 2019 तक भाजपा के हर मैनिफेस्टो में छाया रहा राम मंदिर मुद्दा

New Delhi: लोकसभा चुनाव से ठीक 2 दिन पहले भाजपा ने आज अपना घोषणा पत्र जारी किया। संकलप पत्र का नाम दे भाजपा ने एक बार फिर जानत से कई बड़े वादे किये हैं। जाहिर है पार्टी ने घोषणा पत्र को संकल्प पत्र नाम देते हुए गरीब, युवा, रोजगार लोगों को घर देने जैसे सभी अहम मुद्दों को इसमें शामिल किया। वहीं 2019 के चुनाव में एक बार फिर आज राम मंदिर का मुद्दा भी शामिल रहा जिसको लेकर विपक्ष ने निशाना साधा और पलटवार किया।

आपको बता दें कि, अयोध्या मामला भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में करीब 25 साल से ज्यादा समय से शामिल होता चला आ रहा है। यह मुद्दा पार्टी के हर मैनिफेस्टो में छाया रहा है।

साल 1996 में मंदिर निर्माण का दावा

भाजपा ने करीब 25 साल साल पहले साल 1996 में जब अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया था उस वक्त भी राम मंदिर का जिक्र देखने को मिला था। साल 1991 में ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ वाला स्लोगन जबरदस्त छाया हुआ था। वहीं इसके बाद 96 में चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण का दावा किया गया।

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2004 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर इसका जिक्र किया गया

साल था 2004 और एक बार फिर देश में चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। इस चुनाव में भी भाजपा ने राम मंदिर मुद्दे का जिक्र किया और एक बार फिर देश की जनता से यह वादा किया कि, इस मसले को सुलझा लिया जाएगा।

2009 से 2019 में भी छाया रहा मुद्दा

साल 2009 में भी एक बार फिर भाजपा के घोषणा पत्र में यह मुद्दा छाया रहा और हर किसी ने फिर राह देखी की इस साल तो भक्तों को सरकार ख़ास तोहफा दे ही देगी। हार साल चुनाव के समय यह मुद्दा एक अलग रूप और बदलाव के साथ भाजपा के मैनिफेस्टो में पेश किया जाता रहा है। लेकिन 2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और रामभक्तों और अयोध्या नगरी वालों को यह लगा की इस बार तो सरकार कोई हल जरूर निकालेगी। लेकिन साल बीत गया और फिर 2019 चुनाव की तैयारियां शुरू हुई और मतदान के पहले चरण से दो दिन पहले भाजपा ने अपना घोषणा पत्र जारी किया और फिर इसका जिक्र हुआ और जनता को भरोसा दिलाया गया कि, 2024 तक इसपर जरूर कुछ काम किया जायेगा।