राममंदिर पर कानून की मांग पर राम माधव बोले, कोर्ट का पहले इंतजार, दूसरे विकल्पों पर करेंगे विचार

New Delhi:  2019 लोकसभा चुनाव आने वाले है। ऐसे में चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण की मांग उठ रही हैं। इस कड़ी में राजनीति नेताओं के काफी बयान सामने आ रहे है। राम मंदिर पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। राम माधव ने कहा कि अध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है, लेकिन फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट ने अगली बेंच के लिए 4 जनवरी की तारीख दी है। हम उम्मीद करते हैं कि कोर्ट फास्ट-ट्रैक तरीके से इस पर कार्यवाही करेगा और जल्द ही निपटारा कर देगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे।

इसके साथ ही राम माधव ने कहा कि अगर राहुल गांधी हालिया जीतों की वजह से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी हो सकते होते, तो महागठबंधन की ज़रूरत ही नहीं होती। आज भी कोई नेता, स्टालिन को छोड़कर, महागठबंधन के नेता के नाम की पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में छह लोग मौजूद हैं।

Ram Madhav

वहीं राम मंदिर के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की घोसी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हरिनारायण राजभर ने विवादित बयान दिया। बीजेपी सांसद हरिनारायण राजभर ने कहा है कि जिस तरह से कारसेवा करके विवादित ढांचे को गिराया गया था, उसी तरह की कारसेवा राम मंदिर निर्माण के लिए भी होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम तिरपाल में हैं, उन्हें ठंड लगती है, बारिश में भीगते हैं, इसलिए उनको प्रधानमंत्री आवास के तहत घर भी मिलना चाहिए।

हरिनारायण राजभर ने कहा कि लोगों की आस्था का फैसला सरकार या सुप्रीम कोर्ट नहीं कर सकता। राम मंदिर 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था का मामला है, जिस तरह कारसेवा से विवादित ढांचे को गिराया गया था, उसी तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार ना करते हुए कारसेवा के द्वारा मंदिर को बनाना चाहिए।

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि वह फैजाबाद के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहेंगे कि रामलला को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की मंशा है कि कोई बिना छत के ना रहे। प्रभु श्रीराम तिरपाल में हैं, उन्हें ठंड लगती है, बारिश में भीगते हैं, इसलिए उनको प्रधानमंत्री आवास के तहत घर मिलना चाहिए।