यहां हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर करते हैं राम मंदिर में आरती, फिर चढ़ाते हैं दरगाह पर चादर

New Delhi: अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर सालों से राजनीति होती आ रही है। लेकिन ऐसे में हमें सद्भावना और एकता की एक मिसाल मध्यप्रदेश के राजगढ़ में देखने को मिलती है।

यहां आपको राम मंदिर (Ram Janki temple) में हिंदू-मुस्लिम एक साथ आरती करते दिखेंगे, वहीं दरगाह (Baba Badakhshani Dargah) पर चादर चढ़ाते भी नजर आएंगे। यहां पर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पिछले 39 साल पेश की जा रही है।

बाबा बदख्शानी की दरगाह

दरअसल, राजगढ़ बस स्टैंड के समीप बाबा बदख्शानी की दरगाह (Baba Badakhshani Dargah) है। दरगाह का 105वां सालान उर्स 10 मार्च से शुरू हुआ है, जो 15 मार्च तक चलेगा। उर्स में देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन शिकरत करने पहुंचे हैं। उर्स के दौरान राजगढ़ नगर के कलमकार परिषद की ओर से एक अनूठी परम्परा भी निभाई जाती है। जिसमें सभी सम्प्रदाय के लोग शामिल हुए और राजगढ़ के पारायण चौक स्थित राम जानकी मंदिर (Ram Janki temple) परिसर में पहले तो उर्स में आए कव्वालों ने कव्वाली व भजन प्रस्तुत किए।

मंदिर से मजार चादर समारोह

इसके बाद हिंदू व मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर भगवान राम आरती की। आरती के बाद राम जानकी मंदिर से बाबा बदख्सानी दरगाह की मजार तक पैदल गए और फिर सामूहिक रूप से मंदिर से मजार चारद समारोह का आयोजन करके चादर बाबा की दरगाह पर चढ़ाई। हिंदू-मुस्लिम की इस तरह की कौमी एकता का मिसाल देते इन लोगों का उत्साह देखते बना।

Quaint Media, Quaint Media consultant pvt ltd, Quaint Media archives, Quaint Media pvt ltd archives, Live Bihar, Live India

मकसद सिर्फ सर्वधर्म सदभाव

दिनेश कुमार नागर ने बताया कि यह अनूठी परम्परा करीब चालीस साल से जारी है। अखिल भारतीय कलमकार परिषद की स्थापना रामसिंहजी ने की थी। उनके निधन के बाद हम सब मिलकर उनकी परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से राम जानकी मंदिर में कव्वाली कार्यक्रम करके दरगाह पर चादर पेश करते हैं। हमारा मकसद सिर्फ सर्वधर्म सदभाव बनाए रखना है।

नवरात्र में मजार से आता है झंडा

साहिद ने बताया कि 39 साल पहले हमारे पिताजी व साहिदा वकील साहब, जमील साहब आदि ने मिलकर कौमी एकता का संदेश देने के लिए यह परम्परा शुरू की थी। उर्स में चादर पेश की जाती है। वहीं नवरात्र में मजार से झंडा मंदिर के लिए आता है। उसमें भी सभी धर्मों के लोग मिलकर यह परम्परा निभा रहे हैं। यह अनूठी परम्परा एकता का संदेश देती है, जो आगे भी जारी रहेगी।