आज की सरकारें सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही करती हैं, देश का सरकारी खज़ाना तो राजीव गांधी ने भरा था

सरकार का राजस्व कैसे बढ़ाया जाये इसका हल केंद्र की सत्ता में बैठी हर सरकार ढूंढती है। राजस्व बढ़ाने के एवज में आम नागरिकों पर भार न पड़े इसका भी ख्याल रखा जाता है। इस तरह सरकार को बहुत व्यवस्थित ढंग से राजस्व बढाने के स्त्रोत के बारे में सोचना पड़ता है। कुछ ऐसी ही सोच के साथ आज से करीब 32 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी बजट पेश करने आये थे। उस बजट से न केवल सरकार की जेब भरी, बल्कि आने वाली सरकारों को भी राजस्व का नया स्त्रोत मिल गया।

प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1987 में एक बजट पेश किया जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में राजस्व का सबसे बड़ा स्त्रोत बन गया। बजट पेश करते हुए प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स (Minimum Corporate Tax) का प्रावधान किया। इससे सभी कंपनियों को अपने बुक प्रॉफिट का 15 फीसदी टैक्स भरना ही होगा। यह आइडिया अमेरिका से लिया गया था।

राजीव गांधी ने मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स लाकर रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों पर काबू पाने की कोशिश की। क्योंकि उस समय रिलायंस और कई बड़ी कंपनियां काफी मुनाफा कमाती थीं, लेकिन सरकार को नाम मात्र का ही टैक्स देती थीं। राजीव गांधी द्वारा शुरू किया गया कॉरपोरेट टैक्स राजस्व का सबसे बड़ा जरिया बन गया। इस समय कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों के टर्नओवर के हिसाब से 25 से 30 फीसदी के बीच है। 250 करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होता है।

दरअसल तत्कालीन राजीव गांधी सरकार में वित्तमंत्री का प्रभार वीपी सिंह को दिया गया था। लेकिन कई कॉरपोरेट घरानों पर रेड डालने के बाद उठे विवाद के बाद उन्हें वित्तमंत्री के पद से हटाकर रक्षा मंत्रालय दे दिया गया था।खाली हुए वित्त मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने पास ही रखा।