कांग्रेस नेता बोले, पीएम मोदी करें याद, राजीव गांधी ने ही खुलवाए थे राम मंदिर के द्वार

New Delhi: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू के दौरान राम मंदिर को लेकर दिए बयान पर लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। पीएम मोदी द्वारा अपने बयान में कहा कि कांग्रेस राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटका रहे है। इस बयान पर राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण में कांग्रेस कोई रोड़े नहीं अटका रही है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को 2019 लोकसभा चुनाव से फिर से राम याद आ गए हैं। हम तो खुद सूर्यवंशी हैं, भगवान राम की रोज पूजा करते है।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने राम मंदिर के दरवाजे खुलवाए थे। वहीं पीएम मोदी के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ( RSS) ने कहा कि लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार राम मंदिर का निर्माण कराने के वादे को अपने कार्यकाल में पूरा करेगी क्योंकि बीजेपी इसके लिए हर संभव कोशिश करने का वादा कर 2014 में सत्ता में आई थी।

वहीं राम मंदिर मुद्दे को लेकर विश्व हिंदू परिषद् (VHP) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वीएचपी ने कहा कि हम पीएम मोदी के बयान से सहमत नहीं है। राम मंदिर का मुद्दा बीते 69 सालों से फंसा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में अब तक जजों की बेंच भी नहीं बनी है जहां मामले की सुनवाई होनी है।

 

वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मामला काफी लंबे वक्त से कोर्ट में है और हिंदू अनंत काल तक मंदिर का इंतजार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने संसद के जरिए राम मंदिर पर कानून लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार कानून लाकर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करे। न्यायिक प्रकिया के पूरे होने से पहले कानून लाया जाना चाहिए।

आलोक कुमार ने कहा कि हम इस सरकार से संसद में कानून लाने का आग्रह करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में लगने वाले कुंभ मेले में 31 जनवरी को धर्म संसद होगी। इस दौरान मौजूद संतों से राम मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा की जायेगी कि आगे क्या किया जाए, इस पर फैसला लिया जायेगा।

आपको बता दें कि राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने अपने बयान में साफ किया कि राम मंदिर पर कोई अध्यादेश नहीं आयेगा, कानून से ही राम मंदिर बनेगा। पीएम मोदी ने कहा कि हम राम मंदिर पर अध्यादेश नहीं लायेंगे। पहले कानूनी प्रक्रिया होगी, अगर कोई हल नहीं निकलता तो अध्यादेश पर विचार किया जायेगा। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया पूरे होने का इंतजार करना होगा।