पंजाब:मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में हजारों की संख्या में जुटे किसान, लगाया जाम

New Delhi: पंजाब के किसानों ने मोदी सरकार के खाद्य वस्तुओं को विदेश से आयात करने के एक मसविदे का किसान संघर्ष समिति (केएससी) के बैनर तले हजारों किसानों यहां विरोध किया। उनका ये विरोध मोदी सरकार की उस नीति के खिलाफ है जिसमें 16 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल होने का निर्णय लिया गया है। केंद्र के इस फैसले के खिलाफ अमृतसर-दिल्ली राजमार्ग पर विरोध प्रदर्शन किया और उसे जाम कर दिया गया।

प्रदर्शनकारियों का मानना ​​है कि सरकार की इस डील से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती होगी जिसका असर उन्हें प्रभावित करेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और इस किसान विरोधी समझौते से बाहर निकलना चाहिए।

किसानों ने 30 मिनट तक अमृतसर हाईवे पर जाम लगाए रखा जिस कारण परिवहन पूरी तरह रुक गया। जिससे लोग घंटों जाम में फंसे रहे।

पंजाब किसन संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पांडेय ने कहा “पहले से ही हमें अपनी उपज के लिए सही दाम नहीं मिल रहे हैं। अब, अगर मोदी सरकार टैरिफ लगाए बिना दूध और बीज के आयात की अनुमति देगी, तो यह हमारे व्यवसाय को प्रभावित करेगा। अगर वे गन्ना आयात करते हैं, तो मिलें बंद हो जाएंगी।” भारत को इसके खिलाफ अंतिम आरसीईपी सौदे का हिस्सा नहीं बनना चाहिए“।

हालांकि, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा था कि भारत RCEP पर हस्ताक्षर करते समय अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। “हर औद्योगिक क्षेत्र RCEP मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विरोध नहीं करता है। फार्मास्यूटिकल और कपड़ा क्षेत्र ने RCEP FTA का समर्थन किया है। आरसीईपी एफटीए में चीन से संबंधित कुछ क्षेत्रों की चिंताएं हम ध्यान रखेंगे। ”

बता दें आरसीईपी एक आर्थिक सहयोग समझौता है, जिस पर आसियान के 10 देशों सहित 16 देशों द्वारा बातचीत की जा रही है