हिंदू मेडिकल स्टूडेंट नम्रता चंदानी की हत्या के विरोध में कराची की सड़कों पर उतरे लोग

New Delhi: कराची में मंगलवार को लरकाना में सिंधी हिंदू लड़की नम्रता चंदानी की हत्या के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया। पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जताते हुए, प्रदर्शनकारियों ने देर रात कराची की सड़कों पर मृतक लड़की के लिए न्याय की मांग की। नम्रता बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) की फाइनल ईयर की छात्रा थी।

लोगों ने सरकार से इस क्षेत्र की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने “नम्रता को इंसाफ दो”, “गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेंगे” जैसे नारे लगाए।

नम्रता मूल रूप से मीरपुर जिले के घोटकी जिले की रहने वाली थी जहां हाल ही में हिंदू मंदिरों को तोड़े जाने की घटनायें हुई थीं। उसका परिवार फिलहाल कराची में रहता है। जानकारी के मुताबिक, नम्रता के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। कमरे की खिड़की खुली हुई थी। कई बार खटखटाने के बाद भी जब कोई आवाज नहीं आई तो गार्ड ने दरवाजे को तोड़ा। अंदर जाकर देखा तो नम्रता का शव चारपाई पर पड़ा था और उसकी गर्दन पर एक रस्सी कसी हुई थी।

नम्रता चंदानी

वाइस चांसलर अनिला रहमान के मुताबिक, पहली नजर में यह खुदकुशी का मामला लगता है लेकिन पुख्ता जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। हालांकि उसके परिवार ने दावा किया है कि उसकी हत्या की गई थी। उसके भाई, विशाल, जो एक चिकित्सा सलाहकार है, ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उसकी हत्या की गई थी।

भाई विशाल सुंदर ने कहा, “यह एक आत्महत्या नहीं थी, आत्महत्या के निशान अलग होते हैं। मुझे उसकी गर्दन के चारों ओर केबल के निशान मिले हैं। उसके हाथ पर भी निशान हैं। ये निशान तो केबल के हैं लेकिन नम्रता की दोस्त ने कहा था कि उसने गले में दुपट्टा बंधा हुआ था।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उसे कुछ समस्या थी तो विशाल ने कहा, “नहीं, ऐसा कुछ नहीं था, मैंने खुद दो दिन पहले उनसे बात की थी। वह एक होशियार छात्रा थी। घटना से दो घंटे पहले निमरिता ने कॉलेज में मिठाई बांटी थी। ऐसा भला क्या हो सकता है कि इसके महज दो घंटे बाद ही वह खुदकुशी कर ले?”

विशाल ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नागरिकों को उनके परिवार का समर्थन करना चाहिए।

बता दें कि अमेरिका में स्थित सिंधी फाउंडेशन के मुताबिक हर साल, 12 से 28 वर्ष की उम्र के बीच की लगभग 1,000 युवा सिंधी हिंदू लड़कियों का अपहरण किया जाता है और जबरन शादी की जाती है।

पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार आयोग के अनुसार, जनवरी 2004 से मई 2018 तक, पाकिस्तान में सिंधी लड़कियों के अपहरण के 7,430 मामले थे। वास्तविक संख्या बहुत अधिक होने का अनुमान है क्योंकि अधिकांश मामले अप्रमाणित हैं।

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