यौन उत्पीड़न के आरोप में सीजेआई को क्लीन चिट देने पर सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन

Supreme Court की आंतरिक जांच समिति ने चीफ जस्टिस Ranjan Gogoi पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप को खारिज कर उन्हें क्लीन चिट दे दी है। जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच समिति की रिपोर्ट शिकायतकर्ता महिला को भी नहीं दी गई है। इस कारण कई स्वंयसेवी संगठनों और महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करना शुरु कर दिया। प्रदर्शन में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता बृंदा करात भी शामिल थीं। प्रदर्शन को तेज होता देख दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आस-पास के क्षेत्रों में धारा-144 लगा दी। पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां से हटा दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। 3 घंटे हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जिस तरह से इस पूरे मामले की जांच हुई है वो सुप्रीम कोर्ट के काम करने के तरीके पर कई सवालिया निशान खड़े करती है। माकपा नेता बृंदा करात ने मीडिया से बात करते हु्ए कहा कि ‘जिस तरह से (सीजेआई पर लगे) आरोपों को ख़ारिज़ किया गया वह प्रक्रिया ही ग़लत है। पीड़ित को (आंतरिक जांच समिति की) रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई? अब जब वे पूरे मामले को ख़ारिज़ कर रहे हैं तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर और अधिक सवाल उठ गए हैं।’

ग़ौरतलब है कि सीजेआई रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ उन्हीं के स्टाफ की सदस्य रही एक पूर्व महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता में आंतरिक समिति बनाई थी। इस समिति ने सीजेआई  पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। समिति ने सोमवार को ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

पिछले कुछ सालों के भीतर ऐसे कई  मौके आए हैं जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसके काम करने को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी साख को बरकरार रखने की चुनौती है।