कैदी ने व्हॉट्सएप पर लिख डारी ऐसी किताब, जिसे मिला सर्वश्रेष्ठ सम्मान, सरकार ने दी 6.4 करोड़

New Delhi:   कभी कभी कोई ऐसी किताब दुनिया के हाथ लगती है, जो नए तरह का इतिहास रच देती है। साहित्यकारों, लेखकों के साथ ऐसा इतिहास अपने को बार-बार दुहराता रहता है। पिछले 6 साल से सिडनी के मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में कैदी का जीवन बिता रहे कुर्दिश-ईरानी शरणार्थी बेहरोज बूचानी ने एक ऐसी किताब लिखी है जिसे करोड़ों रुपए का इनाम मिला है।

हैरत की बात तो ये है कि उन्होंने ये पूरी किताब कैदखाने में रहते हुए मोबाइल पर लिखकर अपने दोस्त को वॉट्सऐप कर दिया। जब यह किताब ‘नो फ्रैंड बट द माउंटेन्स’ छपकर आई तो अब ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ही बचूनी को अपने देश के सबसे बड़े 6.4 करोड़ रुपए के पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान कर दिया है। बूचानी को जब यह पुरस्कार दिया जा रहा था, वह अपने सम्मान में आयोजित समारोह में खुद ही नहीं थे, उस वक्त वह जेल में कैद थे।

साल 2012 में ईरान में कई लेखकों, पत्रकारों और फिल्मकारों को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस दौरान बूचानी वहां से तो निकलने में कामयाब रहे लेकिन समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया में घुसते समय ऑस्ट्रेलियन नेवी ने उनकी बोट को कब्जे में ले लिया। फिर उन्हें 2013 में मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर भेज दिया गया। डिटेंशन सेंटर में रहते हुए भी उनके लिखे लेख छपते रहे हैं। उनकी किताब ‘नो फ्रैंड बट दि माउंटेन्स’ डिटेनशन सेंटर के उनके अनुभवों पर ही आधारित है।

इसके लिए वे अपने मोबाइल पर फारसी में एक-एक चैप्टर पूरा करते और फिर इसे अपने दोस्त ओमिड टोफिगियान को भेज दिया करते। किताब लिखने के दौरान उनको सबसे बड़ा इस बात का डर बना रहता था कि कहीं उनका फोन न छिन जाए। तलाशी के दौरान कैदियों के सामान जब्त कर लेते हैं। इसलिए वह अपनी किताब के एक-एक चैप्टर फोन पर टाइप कर वॉट्सऐप के जरिए अपने दोस्त को भेज देते थे। बूचानी का कहना है कि ‘उन्हे खुशी हो रही है, क्योंकि यह मेरे और मेरे जैसे शरणार्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह सिस्टम के खिलाफ बड़ी जीत है।