महंगाई के आंसू रुलाएगा प्याज, सैंकड़ा पार कर डाल सकता है आम आदमी की जेब पर भार

New Delhi : प्याज के भाव आजकल बहुत बढ़ गए हैं। बढ़ेंगे ही क्योंकि इस बार की भारी बारिश ने प्याज की पैदावार में बहुत गिरावट की है। कर्नाटक, आंध्रप्रदेश में बारिश से हुए नुकसान की वजह से मंडियों में प्याज की आपूर्ति में मंदी आई है।

3 इडियट्स के राजू की मां के अनमोल वचन सच होते नज़र आ रहे हैं, लेकिन इस बार पनीर की जगह प्याज सुनार की दुकान पर सोने की थैलियों में बिकेगा।

बारिश ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्याज को भी बर्बाद कर दिया है। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज का थोक रेट 4500 रुपए क्विंटल तक पहुंच गया है। लोग जब रेहड़ी पर पहुंचते हैं तो यही प्याज उन्हें 50-60 रुपए में मिलता है। दिल्ली में प्याज 65 रुपए किलो खुदरा रेट चल रहा है।

प्याज की चलती मंदी से परेशान सारी मंडी।
प्याज की चलती मंदी से परेशान सारी मंडी।

सितंबर 2015 के बाद 2019 में दर्ज की गई ये प्याज की सबसे बड़ी महंगाई है। लासलगांव के डायरेक्टर और पूर्व अध्यक्ष जयदत्त सीताराम होल्कर बताते हैं कि सितंबर की शुरूआत में प्याज 2500 रुपए क्विंटल था जो कि अब 4500 रुपए क्विंटल चल रहा है। मंडी में प्याज का आवक 20000 क्विंटल चल रहा है। त्योहार का सीजन है इसलिए मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसा ही चलता रहा तो प्याज 6500 रुपए क्विंटल से लेकर 8000 क्विंटल तक पहुंच जाएगा फिर लोगों को 90-100 रुपए किलो तक का झटका लगा करेगा।

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मध्य प्रदेश और राजस्थान से प्याज की मात्रा और क्वालिटी दोनों ही निम्न स्तर पर आ रहे हैं। दिल्ली में डेली 50-60 ट्रक प्याज के पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में मांग और बढ़ेगी। 1.5 महीने फसल पिछड़ गई है इसलिए आवक कमजोर रहेगी। वैसे सितंबर के मध्य में प्याज का बोलबाला होता था जबकि इस बार आवक उतनी नहीं है।

अगर चीन और मिस्त्र जैसे देशों से प्याज का आयात सही मात्रा में हो जाए तो बात बन सकती है। बढ़ती कीमतों के चलते सरकार ने पिछले सप्ताह ही न्यूनतम निर्यात मूल्य और शुल्क मुक्त आयात जैसे कदम उठाए हैं।