संसार का सामना करने के लिए मन में श्रद्धा भाव रखो

New Delhi : मानव जाति कठिन समय से गुज़र रही है। बढ़ते हुए तनाव के स्तर, आतं’कवादी हमले, पर्यावरण प्रदूषण के साथ खतरे हर दिशा में छुपे हुए हैं। जब समय बुरा होने लगे, हमें अपनी श्रद्धा (Pravachan) ताज़ा करनी चाहिए। श्रद्धा ही मनुष्य को कठिन समय से बाहर खींच लाती है। ये कई प्रकार से छुपी हुई हिम्मत और व्यक्ति का सामर्थ्य बाहर ले आती है।

कठिन समय से गुजरने के लिए जो दूसरी चीज़ चाहिए वो है शांत मन (Pravachan)। जब मन शांत हो और तुम केन्द्रित हो, तब किसी भी परिस्थिति का सामना करना बहुत आसान हो जाता है। इसके लिए तुम्हें मन को वर्तमान क्षण में रहने की और तनाव को छोड़ने की थोड़ी सी शिक्षा देनी होगी। ये साँस पर ध्यान देने से हो सकता है।

भीतर की शांति को अपनी श्रद्धा के साथ जोड़ दो तब किसी भी परिस्थिति का सामना करने का फार्मूला तुम्हारे हाथ आ जाएगा। श्रद्धा होना मतलब इस बात को समझना कि, इश्वर का संरक्षण तुम्हारे साथ है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए इतनी श्रद्धा काफी है। फसल काटने के समय किसान एक बड़ी सी छलनी लेकर सारी फसल उसमें डाल देता है इसके बाद एक ऊँचे मचान पर खड़ा हो जाता है और छलनी को हिलाने लगता है। छिलके हवा में उड़कर कहीं खो जाते हैं अनाज ज़मीन पर गिरकर वहीं रह जाते हैं। अगर तुम्हारी श्रद्धा हिल जाती है और ऐसा बार-बार होता है तो ये बिलकुल उन छिलकों के सामान है।

जब मुश्किल परिस्थिति आती है तब अगर तुम्हारी श्रद्धा तुरंत ही हिल जाए तब तुम उसका सामना अपनी मुस्कान बरकरार रख कर नहीं कर सकोगे। अगर तुममें श्रद्धा नहीं है, तो तुम डर और अवसाद के शिकार हो जाओगे। तुम्हरे पास कोई सहारा नहीं होगा। अगर तुम्हारे पास श्रद्धा है तो तुम एक ठहराव पा सकोगे। और अगर तुम में श्रद्धा है तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। सब कुछ शांत हो जाएगा।

एक बार तुम जान जाओ कि तुम भाग्यवान हो तब सब असुरक्षा की भावनाएँ गायब हो जाएँगी। जीवन 80 प्रतिशत आनंद है और 20 प्रतिशत दुःख। पर हम उस 20 प्रतिशत को पकड़े रहते हैं और उसे 200 प्रतिशत बना देते हैं! ये जानबूझ कर नहीं किया जाता, बस हो जाता है। इस संसार में सब कुछ हमेशा सम्पूर्ण नहीं होता। यहाँ तक कि श्रेष्ठतम, महत्तम कार्य जो उत्कृष्ट इरादों से किया गया हो, उसमें भी कुछ त्रुटियाँ होंगी, बहुत स्वाभाविक है।