EVM पर विपक्ष चौकन्ना.. स्ट्रॉन्ग रूम के बार रखे कई एजेंट,8-8 घंटे की शिफ्ट में कर रहे निगरानी

NEW DELHI: सभी चैनलों के एग्जिट पोल के बाद BJP बहुत खुश है। नेता लोग मिठाइयों के ऑर्डर दे रहे हैं। लेकिन विपक्षी दलों की ओर से ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और चंदौली जैसे मामलों को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। लेकिन चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सभी EVM कड़ी सुरक्षा में हैं।

इसके बावजूद सियासी पार्टियों ने स्ट्रॉन्ग रूम यानी जहां EVM रखी गई हैं, वहां पर पूरी मुस्तैदी के साथ अपने लोगों को सुरक्षा में लगा रखा है। इसके अलावा पार्टियां कई एहतियात बरत रही हैं और मतगणना के लिए निर्देश भी जारी किए हैं। लोकसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही सभी EVM को स्ट्रॉन्ग रूम में रखा गया है, जो पूरी तरह से लॉक और सीसीटीवी की निगरानी में है। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा CRPF कर रही है। स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। हालांकि, स्ट्रॉन्ग रूम के सामने परिसर में हर प्रत्याशी को अपने एजेंट को निगरानी करने की इजाजत दी गई है।

चुनाव आयोग ने हर एक स्ट्रॉन्ग रूम पर एक पार्टी को तीन एजेंट रखने की अनुमति दी है। ये एजेंट एक साथ भी रह सकते हैं और चाहें तो बारी-बारी से भी निगरानी कर सकते हैं। हालांकि, गाजीपुर में बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद वहां के प्रशासन ने एक स्ट्रांग रूप पर पांच लोगों को निगरानी करने की अनुमति दी है। यह व्यवस्था सिर्फ गाजीपुर के लिए ही है।

बता दें कि एक स्ट्रॉन्ग रूम में एक से लेकर तीन विधानसभा की EVM रखी गई हैं। यह स्ट्रॉन्ग रूम की क्षमता पर निर्भर करता है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने स्ट्रॉन्ग रूम पर अपने एजेंट तो नियुक्त कर ही रखे हैं, साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर करीब 50 मीटर दूरी पर अपने दस से बीस लोगों को निगरानी के लिए लगा रखा है। ये लोग आठ-आठ घंटे के अंतराल पर सुरक्षा कर रहे हैं।