PM Modi ने कहा – अब घर ही ऑफिस, सहयोगियों के साथ ब्रेक इतिहास बन गया, इंटरनेट मीटिंग रूम

New Delhi : कोरोना आपदा के बीच PM Narendra Modi ने लिंक्डइन पर लोगों से चर्चा की। PM Modi ने कहा -कोरोना मुश्क‍िलें लेकर आया है। कोरोनावायरस ने पेशेवर लाइफ को पूरी तरह से बदल दिया है। हमारा घर ही हमारा ऑफिस है। इंटरनेट हमारा नया मीटिंग रूम है। कुछ समय के लिए ऑफिस के सहयोगियों के साथ ब्रेक लेना इतिहास बन गया है। मैं भी इन बदलावों में ढलने की कोशिश कर रहा हूं। जमीनी स्तर की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए, समाज के कई वर्गों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठकें कर रहा हूं। गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज समूहों और सामुदायिक संगठनों के साथ व्यापक बातचीत हुई। रेडियो जॉकी के साथ भी बातचीत हुई। इसके अलावा, मैं समाज के विभिन्न वर्गों से फीडबैक लेने के लिये रोजाना कई फोन कर रहा हूं।
उन तरीकों को समझने की कोशिश कर रहा हूं जिनके माध्यम से लोग इन दिनों में अपना काम जारी रखे हुए हैं। हमारे फ़िल्मी सितारों द्वारा कुछ रचनात्मक वीडियो हैं जो घर पर रहने का प्रासंगिक संदेश देते हैं। हमारे गायकों ने एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट किया। शतरंज के खिलाड़ियों ने डिजिटल रूप से शतरंज खेला और इसके माध्यम से COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिया। आखिरकार, प्रौद्योगिकी का सबसे परिवर्तनकारी प्रभाव अक्सर गरीबों के जीवन में होता है। यह तकनीक है जो नौकरशाही पदानुक्रम को ध्वस्त करती है, बिचौलियों को समाप्त करती है और कल्याणकारी उपायों को तेज करती है।

PM Modi के लिंक्डइन प्रोफाइल से ली गई तस्वीर

इधर कोरोना से जारी जंग में सबसे बड़ी खबर गोवा से आई है। गोवा में पिछले 17 दिनों से कोरोना का एक भी नया केस नहीं आ रहा था और जो कोरोना के पहले से मरीज थे वे सभी ठीक हो गये हैं। गोवा में एक अंतिम कोरोन मरीज का टेस्ट भी आज पॉजेटिव आया है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सभी डॉक्टरों और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद कहा। गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा गोवा में कोरोना का अब एक भी मामला नहीं है। यहां कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या शून्य हो गई है। यहां के सभी पॉजिटिव केस अब नेगेटिव हैं। मैं डॉक्टरों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रति बहुत आभारी हूं, जिन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अथक और जोखिम भरा काम किया।
देश में कोरोना वायरस को लेकर डेली ब्रीफिंग में आज स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय और आईसीएमआर ने इससे जुड़े नए तथ्य और आंकड़े सामने रखे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कुल मरीजों की संख्या 15712 पहुंच गई है, जिसमें 2231 मरीज ठीक हुए हैं। 23 राज्यों के 54 जिलों में 14 दिन से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इस दौरान आईसीएमआर ने कहा कि अबतक तीन लाख 86 हजार टेस्ट हुए हैं। करीब आठ हजार टेस्ट निजी लैब में भी हुए हैं।

सोशल डिस्टेन्सिंग ही जीत की कुंजी है

कोरोना आपदा और लॉकडाउन की वजह से मजदूरों के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर रोक लगा दी गई है। गृह मंत्रालय ने मंत्री समूह की बैठक के बाद इस पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जो जहां है, वहीं रहे। राज्य सरकारें मजदूरों को उनकी क्षमता और योग्यता के हिसाब से काम दें। प्रवासी मजदूरों का समूह राज्य के अंदर ही अपने कार्य स्थल पर जाना चाहे तो उनकी स्क्रीनिंग की जाए, जिनमें बीमारी के लक्षण न हों उन्हें उनके कार्यस्थल ले जाया जाए।
गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन पर 15-16 अप्रैल को जारी अपनी गाइडलाइन में संशोधन भी किया है। इसमें कहा गया कि लॉकडाउन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा गैर-जरूरी वस्तुओं की सप्लाई नहीं की जा सकेगी। इस पर प्रतिबंध जारी रहेगा। यानी इन कंपनियों से फिलहाल मोबाइल, टीवी, रेफ्रिजरेटर और रेडीमेड गारमेंट जैसे गैर जरूरी सामान नहीं खरीद सकेंगे। सरकार ने 4 दिन पहले जारी गाइडलाइन में ई-कॉमर्स कंपनियों को 20 अप्रैल से सभी सामानों की सप्लाई की छूट दे दी थी।

तेजी से लोग कोरोना से ठीक हो रहे हैं

गृह मंत्रालय ने राज्यों के साथ बैठक कर महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कर हालात का जायजा लिया, गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के साथ बैठक की। इसमें कहा गया कि लॉकडाउन का पूरी तरह पालन होना चाहिए। जो हॉटस्पॉट व कंटेनमेंट जोन में नहीं हैं, वहां सावधानी बरती जानी चाहिए और छूट के नियमों का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में भी कई तरह की छूट दी गई हैं, अधिकारियों को उचित व्यवस्था करनी चाहिए। बड़े औद्योगिक इकाइयों और परिसरों के संचालन में विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे परिसरों में कर्मचारियों को अंदर ही रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। मजदूरों को रोजगार देने पर भी खास ध्यान देना होगा। ग्रामीण इलाकों में दिशा-निर्देशों के पालन के लिए पर्याप्त गश्त होनी चाहिए। राहत कैंपों में रह रहे मजदूरों के भोजन की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए। अब सामुदायिक परीक्षण हो रहे हैं, ऐसे में मेडिकल टीमों को समुचित सुरक्षा दी जानी चाहिए।

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