शहीद भगत सिंह की जयंती पर बोले मोदी- ‘उनके साहसी काम लाखों लोगों को करते हैं प्रेरित,उनको नमन’

NEW DELHI: आज भगत सिंह का जन्मदिवस है। सभी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए बड़ी बात कही है।

नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा- ‘शहीद भगत सिंह का नाम वीरता और बलिदान का पर्याय है। उनके साहसी कार्य लाखों लोगों को प्रेरित करते रहते हैं। वह युवाओं के दिमाग में सबसे लोकप्रिय आइकन में से एक है। मैं भारत माता के इस महान सपूत को उनकी जयंती पर नमन करता हूं।’

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भगत सिंह ने अमृतसर के जलियांवाला बाग की रक्त-रंजित मिट्टी की कसम खाई कि वह इन निहत्थे लोगों की हत्या का बदला अवश्य लेकर रहेगा। सन् 1920 में गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन चलाया और देशवासियों से आह्वान किया कि विद्यार्थी सरकारी स्कूलों को छोड़ दें व सरकारी कर्मचारी अपने पदों से इस्तीफा दे दें। उस समय नौंवी कक्षा में पढ़ रहे भगत सिंह ने सन् 1921 में गांधी जी के आह्वान पर डी.ए.वी. स्कूल को छोड़ लाला लाजपतराय द्वारा लाहौर में स्थापित नैशनल कॉलेज में प्रवेश ले लिया। इस कॉलेज में आकर भगत सिंह यशपाल, भगवती चरण, सुखदेव, रामकिशन, तीर्थराम, झण्डा सिंह जैसे क्रांतिकारी साथियों के सम्पर्क में आए। कॉलेज में लाला लाजपत राय व परमानंद जैसे देशभक्तों के व्याख्यानों ने देशभक्ति का अद्भुत संचार किया। कॉलेज के प्रो. विद्यालंकार जी भगत सिंह से विशेष स्नेह रखते थे। वस्तुतः प्रो. जयचन्द विद्यालंकार ही भगत सिंह के राजनीतिक गुरु थे। भगत सिंह उन्हीं के दिशा-निर्देशन में देशभक्ति के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

इसी समय घरवालों ने भगत सिंह पर शादी का दबाव डाला तो उन्होंने विवाह से साफ इनकार कर दिया। जब हद से ज्यादा दबाव पड़ा तो देशभक्ति में रमे भगत सिंह देश की आजादी के अपने मिशन को पूरा करने के उद्देश्य से 1924 में बी.ए. की पढ़ाई अधूरी छोड़कर कॉलेज से भाग गए। फिर वे केवल और केवल देशभक्तों के साथ मिलकर स्वतंत्रता के संघ’र्ष में जूट गए। कॉलेज से भागने के बाद भगत सिंह सुरेश्चन्द्र भट्टाचार्य, बटुकेश्वर दत्त, अजय घोष, विजय कुमार सिन्हा जैसे प्रसिद्ध क्रांतिकारियों के सम्पर्क में आए। इसी के साथ भगत सिंह उत्तर प्रदेश व पंजाब के क्रांतिकारी युवकों को संगठित करने में लग गए।

भगत सिंह के परिवार वालों ने काफी खोजबीन करके भगत सिंह से लिखित वायदा किया कि वह घर वापिस आ जाए, उस पर शादी करने के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। परिवार वालों के इस लिखित वायदे व दादी जी के सख्त बीमार होने के समाचार ने भगत सिंह को वापिस घर लौटने के लिए बाध्य कर दिया। घर आकर वे पंजाब भर में घूम-घूमकर समाज की समस्याओं से अवगत होने लगे। सन् 1925 के अकाली आन्दोलन ने भगत सिंह को फिर सक्रिय कर दिया। अंग्रेज सरकार ने झूठा केस तैयार करके भगत सिंह के नाम गिरफ्तारी वारन्ट जारी कर दिया। भगत सिंह पंजाब से लाहौर पहुंच गए और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय होकर अंग्रेज सरकार की नाक में दम करने लगे।