7.5 करोड़ खर्च और गोताखोरों के 7 साल के अथक प्रयास के बाद ठाणे में समुद्र से बरामद हुई हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल

New Delhi : Well known Social worker Dr Narendra Dabholkar की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद कर ली गई है।पिछले सात साल से इस पिस्तौल को खोजने की कोशिश हो रही थी। नॉर्वे के गोताखोरों ने पिस्तौल ठाणे में अरब सागर से निकाली।जांच के लिए इसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।

डॉ दाभोलकर की अगस्त 2013 में 2 अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। CBI Sources का कहना है कि हत्या के करीबसाढ़े सात साल बाद बरामद हुई इस पिस्तौल को तलाशने में करीब 7 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च हुए। सीबीआई को अगस्त 2019 मेंपुणे की शिवाजीनगर कोर्ट से ठाणे की खाड़ी में हथियार तलाशने की मंजूरी मिली थी। इसके बाद नॉर्वे के गोताखोरों को इसकी खोज मेंलगाया गया। हथियार ढूंढने के लिए दुबई स्थित एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स ने नार्वे से अपनी मशीनरी पहुंचाई।

Dr Dabholkar : file pic

 

Hindustan Times ने सीबीआई के अधिकारी के हवाले से बताया कि ठाणे की खाड़ी में कई दिनों तक तलाश करने के बाद एकपिस्तौल मिली। बैलिस्टिक्स विशेषज्ञ अब दाभोलकर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताए गए बुलेट के आकार और प्रकार के आधार परजांच करेंगे कि क्या इसी पिस्तौल का हत्या में इस्तेमाल हुआ था।

गोताखोरों ने खाड़ी से पिस्तौल की तलाश के लिए चुंबकीय स्लेज का इस्तेमाल किया। CBI ने पूरे ऑपरेशन की व्यवस्था की। इसमेंराज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करने से लेकर पर्यावरण की मंजूरी हासिल करने तक की व्यवस्था थी। यहां तक कि नॉर्वे से मशीनरीलाने के लिए लगभग 95 लाख के सीमा शुल्क की छूट भी मिली। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि पिस्तौल की तलाश में 7.5 करोड़रुपए खर्च हुए।

दाभोलकर मामले में बचाव पक्ष के एक वकील ने कहामैं जांच के उन पहलुओं पर इस वक्त बात नहीं करना चाहता जिन्हें कोर्ट में पेशनहीं किया गया है, लेकिन अगर सच में ऐसा हुआ है, तो मुझे लग रहा है कि उन्हें अप्रैल या फिर अगले 10 दिन में ट्रायल शुरू कर देनाचाहिए। मुझे निजी तौर पर नहीं पता कि गोताखोर कहां से आए और कैसे ये प्रक्रिया चली। यही दिलचस्प है कि खोज वर्षों तक चली।मुझे ये समझ नहीं रहा है कि ये सब इतना लंबा क्यों चला है।

डॉ दाभोलकर हत्याकांड की सुनवाई कर चुके बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सत्यरंजन धर्माधिकारी ने पिछले महीने निजी कारणों काहवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने मामले में सीबीआई जांच की धीमी गति को लेकर कई आदेश जारी किएथे। दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में ओंकारेश्वर पुल पर सुबह करीब 7.30 बजे दो बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकरहत्या कर दी थी। 2014 में जांच सीबीआई को सौंपी गई। पहली चार्जशीट 6 सितंबर 2016 में दाखिल हुई। इसमें मुख्य साजिशकर्ता केरूप में वीरेंद्र तावड़े और हमलावरों के रूप में सारंग अकोलकर और विनय पवार का नाम आया।

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