अपने लक्ष्यों को लेकर गंभीर लोग आसानी से ढाल लेते हैं खुद को स्वस्थ आदतों में

Journal of Health Psychology में प्रकाशित शोध में आया सामने

हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि जीवन में एक लक्ष्य तय कर लो, लक्ष्य हमारे जीवन की दिशा तय करता है ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन ये हमारे स्वास्थ्य की दिशा भी तय करता है इस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल लग सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का ऐसा ही मानना है, विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों के जीवन का उद्देश्य ज्यादा मजबूत होता है वो आसानी से स्वस्थ भोजन के बारे में निर्णय ले पाते हैं उन लोगों की तुलना में जीने जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता है या जो अपने लक्ष्य को लेकर दुविधा में होते हैं।

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो खुद को स्वस्थ रखने के लिए योगा, जिम, दवाईयां और ना जाने किन-किन चीजों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन फिर भी अपनी खाने की आदतों के कारण आपके स्वास्थ्य में कोई खास बदलाव नहीं आया है तो आज ही अपना कोई लक्ष्य तय कर लीजिए और उसे पाने के लिए भी उतनी ही मजबूत इरादे के साथ काम पर लग जाइए।

Journal of Health Psychology में प्रकाशित शोध के मुताबिक ये पहले के अध्ययनों में भी पक्के तौर पर माना गया है कि लक्ष्य और स्वास्थ्य का आपस में जुड़ाव है लेकिन ये किस तरह से स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देता है ये साफ नहीं है। शोधकर्ता Kang और उनके साथियां ने इस बात को जांचा कि जिन लोगों का लक्ष्य जितना ज्यादा मजबूत होता है वो उतनी ही आसानी से स्वास्थ्य से संबंधित फैसलों को आसानी से ले सकते हैं।

इसका अध्ययन करने के लिए उन्होंने उन लोगों के जीवन का अध्ययन किया जिनका ज्यादातर काम बैठे रहने का होता है और जिन्हें ज्यादा दूसरों की तुलना में ज्यादा व्यायाम करने की जरूरत होती है। इस सर्वे में उन्होंने लोगों से पूछा कि मेरे जीवन में कथनों पर उनकी सहमति और असहमति पूछी पहले में उन्होंने पूछा कि मेरे जीवन में मुझे दिशा देने वाला लक्ष्य है और दूसरे में यह कि मुझे नहीं पता मैं अपने जीवन में क्या करने की कोशिश कर रहा हूँ।

इसके बाद उन्होंने उन लोगों को शारीरिक श्रम को बढ़ावा देने वाले संदेश दिखाए, fMRI scanner के जरिए उनके दिमाग के उन हिस्सों पर नजर रखी जो उस समय सक्रिय थे जब वो दुविधा की स्थिति में थे। इस शोध में ये बात निकल कर सामने आई कि जो लोग अपने जीवन के लक्ष्य को लेकर मजबूत भावना रखते थे वो स्वास्थ्य संदेशों से सहमत थे और उनके दिमाग के उन हिस्सों में कम हरकत थी जो कि दुविधा की स्थिति में काम करते हैं। इस शोध से साफ होता है कि जो लोग अपने जीवन के लक्ष्य को जितनी तवज्जो देते हैं वो अपने स्वास्थ्य को लेकर भी उतने ही गंभीर होते हैं और वो आसानी से स्वस्थ जीवन जीने के तरीकों को भी चुन सकते हैं।