संविधान दिवस पर कुछ ऐसे सजी संसद और राष्ट्रपति भवन

New Delhi: संसद और राष्ट्रपति भवन को संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर रंगबिरंगी एलईडी लाइट्स के जरीए सजाया गया। इसमें कई तरह की अत्याधुनिक लाइट्स का इस्तेमाल किया गया है। इस अवसर पर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना संबोधन देंगे।

संविधान दिवस पहली बार 2015 में भारत के पहले कानून मंत्री डॉ. भीम राव अंबेडकर को श्रद्धांजलि के रूप में मनाया गया था। जिन्होंने भारतीय संविधान के प्रारूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसी के संबंध में घोषणा 11 अक्टूबर, 2015 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुंबई में स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी की आधारशिला रखते हुए की गई थी। इस दिवस को पहले कानून दिवस के तौर पर मनाया जाता था।

26 नवंबर, उस दिन को चिह्नित करता है जब ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के दो साल से ज्यादा समय बाद भारत ने 1949 में अपना संविधान रचा। संविधान अगले साल 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ, इसलिए 1930 में इसी दिन कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पारित पूर्ण स्वराज की प्रतिज्ञा के रूप में मनाया गया था।

बीते रविवार कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 56 वें संस्करण के दौरान राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने 26 नवंबर को ‘पूरे देश के लिए विशेष दिन’ के रूप में बताया था और आशा व्यक्त की थी कि संविधान दिवस संवैधानिक व्यवस्था आदर्श और मूल्यों को बनाए रखने के लिए राष्ट्र के दायित्व को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा था “मुझे उम्मीद है कि ‘संविधान दिवस’ संवैधानिक आदर्शों और मूल्यों को बनाए रखने के प्रति हमारे दायित्व को मजबूत करता है और इस प्रकार राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। आखिरकार, यह हमारे संविधान के निर्माताओं का सपना था।”

पीएम मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद दोनों 26 नवंबर को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी इस अवसर पर 10 दिनों का लंबा कार्यक्रम आयोजित करेगी। वहीं बता दें कुछ विपक्षी दल संसद के संयुक्त सत्र के दौरान राष्ट्रपति कोविंद के संबोधन का बहिष्कार करेंगे। पार्टियां महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम के खिलाफ संसद परिसर के अंदर अंबेडकर प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रही हैं।