डिजिटल भुगतान का डाटा भारत में ही करना होगा स्टोर :आरबीआई

New Delhi :  भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि भुगतान से संबंधित सभी डाटा को केवल भारत में ही संग्रहीत किया जाना चाहिए और विदेशों में संसाधित किए गए डाटा को नष्ट कर 24 घंटे के भीतर डाटा को देश में वापस लाना होगा। आरबीआई ने भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों (पीएसओ) द्वारा उठाए गए कुछ कार्यान्वयन मुद्दों पर अपने में कहा। “पूरे भुगतान डाटा को केवल भारत में स्थित प्रणालियों में संग्रहीत किया जाएगा …”,

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ई-कॉमर्स कंपनियों और केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के एक हफ्ते बाद, आरबीआई ने बुधवार को कहा कि विदेश में लेनदेन के मामले में, घरेलू डाटा की एक प्रति विदेश में संग्रहीत की जा सकती है।

आरबीआई ने अप्रैल 2018 में परिपत्र जारी कर कहा था भारत के बाहर भुगतान लेनदेन के प्रसंस्करण पर कोई रोक नहीं है, यह डाटा प्रसंस्करण के बाद केवल भारत में संग्रहीत किया जाएगा। डाटा स्टोरेज संबंधी मानदंड भारत में संचालित सभी बैंकों पर लागू होंगे क्योंकि यह सभी बैंक भुगतान प्रणाली जैसे कि RTGS, NEFT, NPCI और कार्ड जैसी सुविधायें प्रदान करती है। लेकिन कुछ बैंक ऐसा करना जारी रख सकते हैं। क्योंकि कुछ विदेशी बैंको को विदेशों में बैंकिंग डाटा संग्रहीत करने की अनुमति दी गई है। हालांकि अमेरिका द्वारा भारत की इस पॉलिसी के कारण भारत को H1B वीजा आवंटन में कटौती का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि वीजा, मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी सरकार और कम्पनियाँ भारत की इस पॉलिसी का विरोध कर रही है।