उत्तराखंड में ऑपरेशन मुक्ति से भीख मांगने वाले बच्चों की ज़िंदगी संवार रही पुलिस

Uttarakhand में पुलिस ने सराहनीय काम करते हुए ‘ऑपरेशन मुक्ति’ के तहत भीख मांगने वाले 67 बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराया।नोडल ऑफिसर शेखर सुयाल ने बताया कि यह देखा गया कि शहर में 292 बच्चे मुख्यधारा से जुड़े हुए नहीं हैं जिनमें से 191 भीख मांगने के काम में लगे थे,हम ऐसे ही बच्चों पर ध्यान दे रहे हैं।

बता दें कि Uttarakhand पुलिस ने भिक्षावृत्ति के विरुद्ध मुहिम चलाई है । भिक्षा नहीं, शिक्षा’ के आदर्श वाक्य के साथ इस अभियान से बच्चों और उनके परिवारों को भीख मांगना छोड़कर शिक्षा चुनने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता है। इन बच्चों के माता-पिता की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए भी प्रयास किए गए हैं। 1 मई को शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में मुख्य रूप से देहरादून जिले पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

पहले चरण में, पुलिस ने जिले में भीख मांगने वाले 292 बच्चों की पहचान की और दूसरे चरण में उन्हें स्कूलों में खुद को दाखिला दिलाने के लिए राजी करने के लिए उनके पास गए।अधिकारियों ने उनके परिवार के सदस्यों से भी आग्रह किया कि वे उन्हें भीख मांगने के लिए प्रेरित न करें।

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देहरादून जिले के अलावा, ‘ऑपरेशन मुक्ति’ के अभियान राज्य के हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों में भी चल रहा है।

नोडल ऑफिसर शेखर सुयाल ने कहा, “यह ऑपरेशन डीजीपी अनिल रतूड़ी के नेतृत्व में किया जा रहा है। हम उन बच्चों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिन्हें पढ़ाई करनी चाहिए, लेकिन उन्हें ऐसी गतिविधियों में लिप्त होने के लिए तैयार किया गया है। हमारे पास चार टीमें हैं, जिनका नेतृत्व एक सब-इंस्पेक्टर करता है।”

Uttarakhand पुलिस अधिकारी और मुक्ति अभियान के सदस्य राकेश भट्ट ने कहा, “चूंकि गर्मी की छुट्टियों के लिए स्कूल बंद हैं, इसलिए ये बच्चे फिर से सड़कों पर भटकने लगते हैं, जो हमारे सभी प्रयासों को नाकाम कर सकते हैं। इसलिए, हमने एनजीओ की मदद से इन बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है।”

kaushlendra

सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में दिलचस्पी है।गांधी जी का फैन हूँ।समाज में जागरुकता लाना उद्देश्य है।पत्रकारिता मेरा प्रोफेशन है,जुनून है और प्यार भी है।
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