नर्सों में इस बीमारी का खतरा बढ़ा है

औसतन 6.6 घंटे से कम नींद लेती है

हर पेशे से जुड़े लोगों में कोई ना कोई सामान्य बीमारी जरूर पाई जाती है। लेकिन उस वक्त थोड़ी हैरानी होती है जब दूसरे लोगों को ठीक करने वाली नर्सों में ऐसी ही कोई सामान्य बीमारी पाई जाए तो। जी हां, हाल में हुए एक शोध में इस बात का पता चला है कि नर्सों में नींद ना आने और नींद की बीमारी जैसे कि chronic insomnia  का खतरा ज्यादा होता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सोने में परेशानी होती है, अगर वो सो भी जाता है तो बीच-बीच में उसकी नींद खुलती रहती है और उसे वापिस सोने में भी काफी परेशानी आती है। इसके पीड़ित व्यक्ति का मूड खराब रहता है, सुबह उठने के बाद भी वो थकान महसूस करता है।

 

Sleep Journal में प्रकाशित इस शोध के पाया गया कि नींद की कमी और नींद की बीमारी के आम लक्षणों की मेडिकल सेंटर में काम करने वाली नर्सों में अधिकता पाई गई है। मुख्य अध्ययनकर्त्ता Francis Christian ने कहा कि हम नर्सों की संख्या देखकर हैरान हैं जो कि संभावित रूप से नींद की सामान्य बीमारी से जूझ रही हैं विशेष रूप से chronic insomnia और shift work disorder की बीमारी से।

इस अध्ययन के लिए शोधकर्त्ता समूह ने 1,165 नर्सों पर एक ऑनलाइन सर्वे किया। उसमें उनसे उनके सोने का शैड्यूल और उन दवाईयों के बारे में पूछा गया जो वो नींद के लिए लेती हैं। शोध में ये पाया गया कि औसतन नर्स 6.6 घंटे से कम की नींद हर रात लेती हैं जबकि एक स्वस्थ व्यक्ति को हर दिन कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

Chronic insomnia की बीमारी 31 प्रतिशत नर्सों में पाई गई, 27 प्रतिशत नर्सों नींद के लिए दवाई लेती पाई गई और 13 प्रतिशत नर्सों ने खुद को जगाए रखने के लिए दवाईयों का सहारा लिया। 31 प्रतिशत नर्सों में shift work disorder की बीमारी पाई गई। शोधकर्त्ता ने कहा कि shift work disorder के दबाव को नर्सों में कम करने के लिए उनके काम के घंटों मे बदलाव लाना चाहिए।