अगले तीन साल तक देश में नहीं खुलेगा कोई लॉ कॉलेज, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने लगाई रोक

New Delhi: देश के लॉ कॉलेजों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नए संस्थानों को खोलने पर तीन साल की रोक लगा दी है। यह रोक राज्य द्वारा प्रस्तावित लॉ कॉलेज खोले जाने के प्रस्ताव पर लागू होगी। राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय इससे बाहर होंगे।

भारत में कानूनी अभ्यास और शिक्षा को नियंत्रित करने वाली बीसीआई ने रविवार को यह प्रस्ताव पारित किया और कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

“बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश में नए लॉ कॉलेज खोलने पर तीन साल की रोक लगा दी है। किसी भी नए संस्थान के लिए किसी नए प्रस्ताव या आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। शीर्ष बार निकाय ने कहा कि यह मौजूदा संस्थानों को बेहतर बनाने पर भी काम करेगा।

बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि इस रोक को लगाने के पीछे का आइडिया यह है कि इससे देशभर में लॉ कॉलेजों की अनियमित वृद्धि पर रोक लगे और कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारा जाए। उन्होंने आगे कहा कि अगले तीन वर्षों तक, बार काउंसिल ऑफ इंडिया उन मौजूदा संस्थानों के मानकों में सुधार पर जोर देगा, जिनके पास कोई बुनियादी ढांचा और फैकल्टी नहीं है।

मनन मिश्रा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया, संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है। यह अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए, कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देता है। यह सभी नए लॉ कॉलेजों को संबद्धता देने के लिए भी जिम्मेदार है।

प्रस्‍ताव में कही यह बात

अपने प्रस्ताव में बीसीआई ने  कहा कि देश में अभी 1500 विधि कॉलेज है और कुछ राज्यों और विश्वविद्यालयों के सुस्त रवैये के कारण कई कॉलेज बिना उचित इंफ्रास्ट्रक्चर के चल रहे हैं। राज्य सरकारें शायद ही कभी सरकारी लॉ कॉलेजों और घटक इकाइयों में विधि फैकल्टी की नियुक्ति में रुचि लेती हैं।

बीसीआई ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की आलोचना करते हुए कहा कि 90 प्रतिशत लॉ कॉलेजों को अपने मानकों में सुधार करने के लिए कोई अनुदान नहीं मिलता है। यह भी कहा कि LLM या PhD की डिग्री लेना बहुत आसान है, यही वजह है कि देश में कानून के अच्छे शिक्षकों की कमी है। बता दें कि LLM और PhD की डिग्री बार काउंसिल ऑफ इंडिया के दायरे में नहीं आती है।

बीसीआई ने कहा कि हमने 2016 में भी विश्वविद्यालयों को नए कॉलेजों को मान्यता देने को रोकने का आग्रह किया गया था लेकिन फिर भी 300 एनओसी जारी कर दिए गए। जब बीसीआई ने मान्यता देने से इनकार कर दिया, तो संस्थानों ने कोर्ट में हमारे खिलाफ याचिका दायर की। उसने यह भी कहा कि इस बार वह केवल नए संस्थानों के लिए सिर्फ लंबित प्रस्तावों पर विचार करेगी और नए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

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