चुनाव आयोग का कड़ा फैसला, बंगाल में चुनाव प्रचार पर रोक, गृह सचिव हटाये गए

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनावों के मद्देनजर एक कड़ा फैसला लिया है। आयोग ने बंगाल में चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। कोलकाता में कल हुई हिंसा और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने से आयोग नाराज था। बंगाल में किसी भी तरह का चुनाव प्रचार कल रात 10 बजे के बाद नहीं हो सकेगा। हालांकि बंगाल में प्रचार की अंतिम तारीख 17 मई थी। लेकिन कल हुई हिंसा के बाद आयोग ने यह कड़ा फैसला लिया है।

यह फैसला चुनाव आयोग की 3 सदस्यीय समिति ने लिया है। 3 सदस्यीय समिति ने बंगाल के मुख्य चुनाव आयोग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर यह फैसला लिया है। आयोग ने धारा 324 के तहत यह फैसला लिया है।  चुनाव आयोग ने कहा कि यह पहली बार है जब आयोग ने धारा 324 का इस्तेमाल किया है।

यह पूरा मामला तब शुरु हुआ जब मंगलवार शाम को अमित शाह ने कोलकाता में रोड शो करना शुरु किया। इस रोड शो के दौरान हिंसा हो गई। जिसके बाद ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ दिया गया था।

इस हिंसा के बाद बुधवार को भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला था। भाजपा ने टीएमसी कार्यकर्ताओं की आयोग से शिकायत की थी। इसपर संज्ञान लेते हुए आयोग ने बंगाल में एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है।

चुनाव आयोग ने चुनाव वाले क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर भी रोक लगा दी है।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के एडीजी (सीआईडी) राजीव कुमार और प्रधान सचिव (गृह) अत्री भट्टाचार्य को हटा दिया है। राजीव कुमार को चुनाव आयोग ने नई दिल्ली में गृह मंत्रालय भेजने का फ़ैसला किया है और इन्हें 16 मई को दिन में दस बजे मंत्रालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को भी हटा दिया है। फिलहाल मुख्य सचिव गृह सचिव का कार्यभार संभालेंगे। आयोग ने बंगाल की 9 साटों पर 19 मई को होने वाले चुनावों के लिए यह रोक लगाई है।

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दुम-दुम,बरासात,बशीरहाट,जयनगर,मथुरापुर,जादवपुर,डाइमंड हार्बर, साउथ और नार्थ कोलकाता में 19 मई को चुनाव होना है। आपको बता दें कि बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर 19 मई को चुनाव होना है।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो रहे हैं। हर चरण के मतदान के दौरान हिंसा की खबर आई है। लेकिन कल की अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई घटना काफी बड़ी थी। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास काफी पुराना है। जब वहां वामदलों की लंबे अरसे तक सरकार थी तब भी वहां चुनावी हिंसा की खबरें खूब आती थी।