निर्मला जी ऑटो सेक्टर की मंदी का कारण ओला और उबर हैं तो बाकी उद्योगों का क्या ?

New Delhi: देश मंदी झेल रहा है। रोजगार सृजन करने वाली कई बड़े उद्योग लगातार रोजगार को कम रहे हैं। मंदी को लेकर बिहार के वित्त मंत्री ने बयान दिया था कि हर साल सावन-भादो में मंदी रहता ही है। और अब ऑटो सेक्टर में आई मंदी को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  ने कहा कि आज कल युवा EMI भरने से बचने के लिए ओला-उबर से चलना पसंद करते हैं। मतलब निर्मला सीतारमण ने मंदी के लिए ओला -उबर को जिम्मेदार ठहरा दिया है।

लेकिन क्या मंदी सिर्फ ऑटोसेक्टर में ही है…

पिछले दिनों खबर आई कि देश की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता पारले प्रोडक्‍ट्स ने कहा कि यदि मांग में कमजोरी आगे भी बनी रहती है तो उसे 8 से 10 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ सकता है। पारले प्रोडक्‍ट्स के कैटेगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि हमनें सरकार से 100 रुपए प्रति किलो या इससे कम कीमत वाले बिस्किट पर जीएसटी घटाने की मांग की है, यदि सरकार हमारी इस मांग को स्‍वीकार नहीं करती है तो हमारे पास 8 से 10 हजार लोगों की छंटनी करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा।

टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग में तो मंदी का यह असर है कि पिछले दिनों टेक्सटाइल असोसिएशन को विज्ञापन देकर यह कहना पड़ रहा है कि सरकार हमें बचाए नहीं तो हम डूब जायेंगे। टेक्सटाइल एसोसिएशन के अनिल जैन ने बताया था कि टेक्सटाइल सेक्टर में 25 से 50 लाख के बीच नौकरियां गई हैं। धागों का निर्यात 33 फीसदी कम हो गया है।

इनरवियर उद्योग में भी जून तिमाही में भारी गिरावट दर की गई।चार शीर्ष इनरवियर कंपनियों के तिमाही नतीजे पिछले 10 सालों में सबसे कमजोर रहे हैं।