निर्जला एकादशी- इस एक एकादशी से भीम को मिला था 24 एकादशियों का पुण्य

6 वर्ष बाद बन रहे हैं ऐसे योग

पूरे साल में 24 एकादशी होती हैं, हर माह में एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखने और पूजा करने का विधान है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं इस एकादशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। जो व्यक्ति इस एक एकादशी का व्रत सच्चे मन और पूरे विधि विधान से कर लेता है उसे पूरे वर्ष की एकादशियों के बराबर फल मिल जाता है। इस एकादशी को सबसे कठिन माना जाता है इसमें व्रती को दो दिनों तक जल और भोजन के बिना ही रहना होता है। इसमें व्रती जल नहीं ग्रहण कर सकता है इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इसे निर्जला एकादशी, भीम सेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
इस बार की एकादशी खास है क्योंकि ये गुरुवार को है जो कि वैसे विष्णु भगवान का दिन माना जाता है, ऐसा योग 6 सालों बाद बन रहा है। इस बार एकादशी का शुभ मुहर्त है- प्रारंभ 12 जून शाम के 6 बजकर 27 मिनट से 13 जून 4 बजकर 49 मिनट पर एकादशी तिथि की समाप्ती होगी।

निर्जला एकादशी की कथा-
जब वेदव्यास जी पांडवों को एकादशी व्रत का संकल्प करवा रहे थे तो भीम ने कहा कि पितामाह आप माह में दो दिन उपवास की बात कह रहे हैं मैं एक दिन तो क्या दिन में एक बार भी भोजन के बिना नहीं रह सकता। मैं तो दिन में कई बार भोजन करता हूँ। इस तरह मैं तो एकादशी व्रत के पुण्य प्राप्त नहीं कर पाउंगा। तब व्यास जी ने भीम को बताया था कि पूरे वर्ष में एक एकादशी है जो पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य दिला सकती है और वो है ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी। इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है।

ऐसे रखें एकादशी का व्रत-
सबसे पहले आपको सूर्यादय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो व्रत का संकल्प करना चाहिए। अगर आपके लिए संभव हो तो पूरे दिन जल और भोजन के बिना रहना अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर ऐसा करना मुमकिन ना हो तो व्रत में आप फलों का सेवन और दूध पी सकते हैं। सुबह शाम भगवान विष्णु की पूजा करेंं। अगले दिन सुबह पहले 5 ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपने सामर्थ्य अनुसार उन्हें दान करें उसके बाद भोजन ग्रहण करें।

ये भूल कर भी ना करें-
इस दिन आप तुलसी के पत्ते गलती से भी ना तोड़े। पूजा के लिए आप एक दिन पहले ही पत्ते तोड़ लें। इस दिन चावल नहीं खाने चाहिए। सुबह देर तक सोना भी एकादशी के दिन अच्छा नहीं माना जाता है।