अल्पसंख्यको और दलितों का उ’त्पीड़न उप्र में सबसे ज्यादा ,जबकि नार्थ ईस्ट राज्यों में सबसे कम

New Delhi : केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 2018-19 में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव के 79 और अनुसूचित जाति भे’दभाव के खि’लाफ 672 मामले दर्ज किए।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की तुलना से यह भी पता चलता है कि 2018-19 में उ’त्पीड़न के मामलों की संख्या पहले के दो वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। जबकि एनएचआरसी ने नॉर्थ ईस्ट राज्यों में ऐसे मामलों की सबसे कम संख्या दर्ज की।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की तुलना से यह भी पता चलता है कि 2018-19 में उत्पीड़न के मामलों की संख्या पहले के दो वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। यह आंकड़ा 2017-18 में 464 था जो कि 2016-17 में दर्ज किए गए 505 मामलों से अलग था। भारत की सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इन तीन वर्षों में ऐसे मामलों की सबसे अधिक संख्या के लिए जिम्मेदार है। 2018-19 में उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा लगभग आधे (311) ऐसे मामलों के साथ सर्वोच्च स्थान पर है।

दिलचस्प बात यह है कि एनएचआरसी ने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में इस तरह के सबसे कम मामले दर्ज किए हैं। जिन साढ़े तीन वर्षों में मूल्यांकन किया गया, मणिपुर में अल्पसंख्यकों या एससी के खिलाफ उ’त्पीड़न के कोई मामले दर्ज नहीं हुए।

मंगलवार को गृह मंत्रालय ने यह आँकड़े एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में दिये है। जिसमें यह भी कहा गया कि इस साल 1 अप्रैल से 15 जून तक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न के 5 और एससी के खिलाफ उत्पीड़न के 99 मामले दर्ज किए गए हैं। लोकसभा में यह प्रश्न तमिलनाडु से भारतीय संघ मुस्लिम लीग के सांसद नवसकनी द्वारा पूछा गया था। अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों के लिए, वर्ष 2016-17 में इस तरह के अधिकतम 117 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद 2018-19 और तीन वर्षों में सबसे कम 2017-18 में 67 मामले दर्ज किए गए।