नाग पंचमी – इस वजह से की जाती है नाग देवता की पूजा

हिन्दू धर्म में बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं इन सभी त्योहारों के बारे में एक खास बात ये है कि इन सभी के साथ कोई ना कोई कहानी जुड़ी होती है। आने वाली 5 अगस्त को नाग पंचमी है ये नाग पंचमी बहुत ही खास है क्योंकि इस बार ये सावन के सोमवार को है। लेकिन क्या आपके मन में कभी ये सवाल उठा कि आखिर नाग पंचमी को मनाने के पीछे की वजह क्या है नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं कि क्यों मनाया जाता नाग पंचमी का त्योहार।

नाग पंचमी की कहानी-


एक समय की बात है कालिया नाग यमुना नदी में निवास करता था जिस वजह से उसका पानी काले रंग का होने लगा। उस ज‘हरीले सांप की वजह से यमुना नदी भी ज’हरीली होने लगी। जब इस बारे में भगवान कृष्ण को पता चला तो उन्होंने कालिया के साथ यु‘द्ध करके उसे नदी छोड़ने पर मजबूर कर दिया और उसे पाताल लोक में भेज दिया।

इस तरह से भगवान कृष्ण ने लोगों की उस ज’हरीले नाग से रक्षा की। ऐसा कहा जाता है कि इसी वजह से बृज के निवासियों ने श्रावण माह की पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा शुरू कर उसे नागपंचमी का नाम दिया।

एक अन्य कथा के अनुसार-
एक सेठ के सात बेटे ने उन सभी की शादी हो गई थी। उनमें सातों बेटों में सबसे छोटे बेटे की बहू बहुत ही सुशील और नेक थी। एक दिन बड़ी बहू ने सभी बहूओं को कहा कि चलो घर को पीली मिट्टी से लीपने के लिए मिट्टी लेने चलते हैं। उसके कहने पर सभी बहूएं साथ चल पड़ी और डलियां और खुरपी से मिट्टी को खोदने लगी। तभी अचानक वहां पर सांप निकल आया जिसे बड़ी बहू खुरपी से मा’रने लगी, छोटी बहू ने बड़ी बहू से कहा कि ये बेचारा है इसे छोड़ दो। उसके कहने पर बड़ी बहू ने उसे छोड़ दिया, छोटी बहू उसे ये कहकर कि तुम यहीं रूको में अभी आती हूं वहां से घर चली। लेकिन घर आकर काम में लगने के बाद वो अपनी कही बात भूल गई।

अगले दिन जब उसे अपनी बात याद आई तो वो भागी-भागी सांप से मिलने गई। सांप अभी भी वहीं बैठा था। छोटी बहू ने सांप को देखकर कहा कि भैया नमस्कार। फिर नाग ने कहा कि तुने मुझे भैया कहा इसलिए तुझे छोड़ रहा हूं नहीं तो झूठ बोलने के लिए अभी ड’स लेता। छोटी बहू ने अपनी गलती के लिए माफी मांगी और सांप ने उसे अपनी बहन बना लिया।

कुछ दिन बाद सांप इंसान रूप लेकर अपनी बहन से मिलने पहुंचा और उसके परिवार से कहा कि मेरी बहन को भेज दो। तो सब ने कहा कि इसका तो कोई भाई ही नहीं इस पर सांप ने जवाब दिया कि मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं और बचपन में ही बाहर चला गया था। फिर वो उसे भेज देते हैं।

रास्ते में उसने बता दिया कि मैं वही सांप हूं और उससे बोला कि उसने ड’रने की जरूरत नहीं है। जहां चला ना जाए मेरी पूंछ पकड़ लेना। जब वो उसके घर पहुंची तो ये देखकर हैरान हो गई कि उसका घर धन और ऐश्वर्य से भरा हुआ है। एक दिन गलती से छोटी बहू ने सांप को ठंडे की जगह गर्म दूध दे दिया जिससे उसका मुंह ज’ल गया। जिस पर सांप की मां ने कहा कि अपनी बहन को वापिस घर भेज दो। तो सांप ने अपनी बहन को बहुत सारा धन, सोना, चांदी देकर भेज दिया। सांप ने अपनी बहन को हीरा और मणि का कीमती हार भी दिया था।

कीमती हार को देखकर उसकी प्रशंसा पूरे गांव में फैल गई। जब रानी को इस बात का पता चला तो उसने अपने मंत्रियों के जरिये उस हार को हासिल कर लिया। छोटी बहू ने ऐसा होने पर अपने भाई को मन ही मन सारी बात बताई और कहा कि तुम ऐसा करो कि जब भी रानी अपना हार पहने तो वो सांप बन जाए और जैसे ही वो उसे लौटा दे वो दोबार से मणियों का हो जाएं। सांप ने अपने बहन के कहे अनुसार ही किया और बहू को अपना हार वापिस मिल गया।

बड़ी बहू ने छोटी बहू के पति के कान भर दिए। इस पर उसके पति ने अपनी पत्नी से पूछा कि तुम्हें ये कीमती हार कौन देता है तो उसने मन में ही अपने भाई को याद किया और सांप प्रकट हो गया। फिर छोटी बहू ने पति ने सांप को सत्कार किया। उसी दिन से स्त्रियां नागपंचमी के अवसर पर नाग को अपना भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।