12 वीं पंचवर्षीय योजना के बाद भी जारी रहेगी PMGSY, 84 हजार करोड़ की लागत से बनेंगी सड़कें

12 वीं पंचवर्षीय योजना के बाद भी जारी रहेगी PMGSY, 84 हजार करोड़ की लागत से बनेंगी सड़कें

By: Manvi
August 10, 08:21
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New Delhi. आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को 12वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि से आगे भी जारी रखने का फैसला किया है। इसमें 84,934 करोड़ रुपए का कुल खर्च आने का अनुमान है।

सरकार का कहना है कि 84,934 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की इस योजना के तहत 38,412 परिवारों को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा। इस फंड को राज्य और केंद्र द्वारा साझा किया जाएगा।  इसके दायरे में 250 से अधिक की आबादी वाली बस्तियां  आएंगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लक्ष्‍यों को मार्च, 2022 तक पूरा करना था। हालांकि, इसके फेज-1 के लक्ष्‍यों को हासिल करने की अंतिम समय सीमा मार्च, 2019 कर दी गई और फंड आवंटन में बढ़ोत्‍तरी के साथ-साथ फंडिंग की रूपरेखा को भी बदल दिया गया। इसमें होने वाले खर्च को केंद्र एवं सभी राज्‍यों के लिए 60:40 के अनुपात में और पूर्वोत्‍तर के 8 राज्‍यों एवं 3 हिमालयी राज्‍यों (जम्‍मू-कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड) के लिए 90:10 के अनुपात में निर्धारित किया गया।

बता दें कि अब तक 95 प्रतिशत बस्तियां (1,69,415)आवंटित की जा चुकी हैं। जिसमें से 91 प्रतिशत बस्तियों (1,54,257) को मुख्‍य मार्ग से जोड़ा जा चुका है। इसमें ऐसी 16,380 बस्तियां भी शामिल हैं जिन्‍हें राज्‍यों ने अपने संसाधनों से जोड़ा है।कुल आवंटित लगभग साढ़े 6 लाख किलोमीटर लंबी सड़क में से 5 लाख 50 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। मार्च 2018 तक कुल आवंटन के मुकाबले 12,000 किलोमीटर लंबी सड़क के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

क्या है प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़़क योजना

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को देश के ग्रामीण क्षेत्रों की बिना संपर्क वाली सभी बस्तियों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लक्ष्‍य के साथ 25 दिसंबर, 2000 को शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम के तहत 500 लोगों की आबादी और मैदानी क्षेत्रों से ऊपर की सभी बस्तियों को मुख्‍य मार्ग से जोड़ने की बात कही गई थी। साथ ही विशेष दर्जे वाले राज्‍यों जैसे पूर्वोत्‍तर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर और उत्‍तराखंड में 250 अथवा इससे अधिक आबादी वाली बस्तियों को पात्र माना गया है।इसके अलावा गृह मंत्रालय/योजना आयोग द्वारा पहचान किए गए 88 जनजातीय एवं पिछड़े जिले भी इसमें शामिल हैं। गृह मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए बस्तियों को भी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए पात्र माना गया है।
 

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