उत्तर प्रदेश के इस स्थान पर मुस्लिम पढ़ते हैं सुंदरकांड तो हिंदू चढ़ाते हैं मजार पर  चादर

New Delhi

आज जहां अली और बजरंगबली को लेकर सियासी तीर चलाए जा रहे हैं,  लोगों को धर्मों के आधार पर बांटकर वोट बटोरने की कोशिश की जा रही है  वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर के झींझक में अली और बजरंगबली साथ रहते हैं। यहां पर एक ही  स्थान पर मजार और मंदिर बने हुए  हैं और लोग बिना किसी  भेदभाव, लड़ाई-झगड़े के यहां पर पूजा करने के लिए आते हैं। यहां पर मुस्लिम  चादर भी चढ़ाते हैं और सुंदरकाड  भी पढ़ते हैं।  इसी तरह हिंदू भी मंगलवार को हनुमान जी की अराधना करने आते हैं तो गुरूवार को मजार पर चादर चढ़ाने  भी।

दोनों की जुगलबंदी इतनी अच्छी है कि कोई भी इन्हें अलग नहीं कर सकता है। बजरंगबली का मंदिर और सैयद बाबा की मजार की दूरी महज 10 मीटर है। वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि देश में कुछ भी चल रहा हो ,धर्म के नाम  पर लोग एक-दूसरे से लड़ रहे हों , लेकिन उसका इस स्थान पर कोई असर नहीं पड़ता है। लोग वैसे ही पूजा – अराधना के लिए आते हैं।

50 साल से पेश कर रहा है भाईचारे की मिशाल

झींझक में कई सालों से पशु मेला लगता रहा है जिसके मालिक मानसिंह थे। उन्होंने ही 1969 में इस मंदिर का निर्माण कराया था जिससे पशु खरीदने  या बेचने वाले लोग जब भी वहां आते तो दर्शन करने जरूर जाते थे। मंदिर  बनने के चार साल बाद उस स्थान के मुस्लिम समुदाय ने मंदिर के बगल में  सैयद बाबा की मजार बना दी, उसके पास ही भगवान शिव की भी मूर्ति भी  रखी है। अब पशुमेला तो वहां नहीं लगता है लेकिन  दोनों धर्मों के लोग भाईचारे की भावना को लेकर उस स्थान पर जाते हैं और पूजा -अर्चना करते हैं।

राजनीतिक दलों को लेनी चाहिए सीख

झींझक निवासी लोगों का कहना है कि इस स्थान पर हमेशा से हिंदू- मुस्लिम एकता कायम रही है, कभी धर्म के नाम पर कोई विवाद नहीं हुआ। यह स्थान कस्बे का ही नहीं जिले की एकता का प्रतीक है। इस सांप्रदायिक सौहार्द से राजनीतिक  दलों को सीख लेना चाहिए।