सेक्युलर मोर्चे के बनने के बाद पहली बार साथ दिखे शिवपाल-मुलायम, फिर चढ़ा सियासी पारा

New Delhi: समाजवादी पार्टी की लगातार उपेक्षा का शिकार हुए शिवपाल यादव ने अलग सेक्युलर मोर्चा बना ली हैं। सेक्युलर मार्चा बनाने के बाद पहले बार शिवपाल और मुलायम सिंह यादव एक साथ नजर आए। दरअसल, समाजवादी सेक्युलर मोर्चे ने राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर संबोंधित करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि लोहिया जी गरीब परिवार से थे उनका नाम देश ही नहीं विदेश में उनका नाम है। उन्होंने कहना था कि अन्याय का विरोध न्याय का साथ दो। 

वहीं शिवपाल यादव ने कहा कि आजादी के लड़ाई में लोहिया जी ने अपना अहम योगदान दिया था। लोहिया जी ने हमेशा किसानों के बारे में सोचा। उनका मानना था कि विचार और सिद्धांत अगर पक्के हो तो गरीब किसान का सपना पूरा हो सकता है। शिवपाल ने कहा कि लोहिया की सिद्धान्तों को लेकर ही हमने सेकुलर मोर्चा बनाया है। नेता जी का आशीर्वाद हमेशा रहा है और आगे रहेगा। नेता जी निश्चित हमारे साथ है तो लोहिया जी के आदर्शों को लेकर हम आगे बढ़ेंगे। क्रांति लाएंगे और देश-प्रदेश में बदलाव लाने का काम करेंगे।

आपको बता दें कि इस दौरान शिवपाल यादव बार-बार एक ही बात को दोहराते रहे कि उन्होंने मुलायम के कहने पर ही सेक्युलर मोर्चा का गठन किया हैं। उन्होंने मुलायम को सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष बनने और मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर भी दिया हैं। आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव से मीडिया द्ववारा पूछे जाने पर कि वह किसका साथ देंगे, अपने बेटे अखिलेश की समाजवादी पार्टी का या अपने भाई शिवपाल के सेक्युलर मोर्चा का, तो उन्होंने सपा का साथ देने की बात कही।

जानकारी के लिए आपको ये भी बता दें कि समाजवादी चिंतक डॉ.राममनोहर लोहिया की आज 51 वीं पुण्यतिथि है। 12 अक्टूबर 1967 में 57 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया से अलविदा कह दिया था। राम मनोहर लोहिया का भारतीय राजनीति में बड़ा नाम था। बड़े विचारक और तर्कवादी जैसे शब्द उनके तारीफ में कहे जाते थे। वह ऐसी दुनिया देखना चाहते थे जिसमें न कोई सीमाएं हों और न कोई बंधन।

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