मुकेश अंबानी की रिलायंस ने रचा इतिहास, 150 देशों की जीडीपी से भी बड़ी हुई

नई दिल्ली : मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्री 150 देशों की जीडीपी से भी बड़ी हो गई है। कंपनी का मार्केट कैंप गुरुवार को 10 लाखकरोड़ से ज़्यादा हो गया है। पिछले 30 वर्षों में कंपनी की मार्केट वैल्यू 60000 पर्सेंट बढ़ गई है।

IIFL सिक्यॉरिटीज के संजय भसीन ने कहा कि 2020 की दिवाली तक कंपनी का मार्केट शेयर 12 लाख करोड़ को क्रॉस कर सकता है।उन्होंने कहा कि हम अगली दिवाली पर निफ्टी के 14,000 तक जाने की उम्मीद कर रहे हैं और बाजार में तेजी की अगुवाई रिलायंसइंडस्ट्रीज करेगी। हमारा मानना है कि अगले एक साल में कंपनी का मार्केट कैप 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।रिलायंस केइस सफर की सबसे खास बात यह रही है कि जब भी जरूरत पड़ी, उसने खुद को समय के साथ बदला। पिछले तीन दशकों में कंपनीपहले यार्न मैन्युफैक्चरर से एनर्जी जायंट (तेल-गैस क्षेत्र की दिग्गज कंपनी) बनी और उसके बाद वह डिजिटल और रिटेल सेगमेंट मेंलीडर बन गई।

जनवरी 1991 के बाद से कंपनी के वैल्यूएशन में 60,742 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान रिलायंस ने कई ऐसे मुकाम हासिल किए, जहां उससे पहले कोई अन्य भारतीय कंपनी नहीं पहुंची थी। वह निजी क्षेत्र की देश की पहली कंपनी बनी, जिसकी रेटिंग S&P औरमूडीज ने की।

2019 में 10,000 करोड़ का तिमाही मुनाफा हासिल करने का मुकाम रिलायंस ने हासिल किया। 2 जनवरी 1991 से 29 नवंबर 2019 केबीच रिलायंस के मार्केट कैप में 600 गुना की बढ़ोतरी हुई, जबकि इस दौरान L&T, अशोक लीलैंड, टाटा स्टील, सिएट, टैलब्रोसऑटोमोटिव कंपोनेंट, फेडरल-मुगल, सागर सीमेंट और इंटरनेशनल पेपर के मार्केट कैप में 15 से 205 गुना का इजाफा हुआ। 2009 केबाद से रिलायंस सालाना आधार पर मुनाफे में रही है। वित्त वर्ष 2009 में कंपनी का प्रॉपिट 15,278 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2019 में 39,734 करोड़ रुपये हो गया था। यह सालाना 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।

ग्रोथ के लिए कर्ज

कंपनी ने ग्रोथ के लिए कर्ज का इस्तेमाल किया। कई बार निवेशक इससे चिंतित भी हुए। वित्त वर्ष 2009 में कंपनी पर कंसॉलिडेटेड डेट(ग्रुप स्तर पर एकीकृत कर्ज) 72,256 करोड़ रुपये था, जो 277 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ इस साल 31 मार्च तक 2.87 लाख करोड़रुपये हो गया था। कंपनी ने इसे घटाने का वादा किया है। उसने कहा है कि वह 2021 तक कर्जमुक्त हो जाएगी। रिलायंस के शानदारप्रदर्शन की वजह से ग्लोबल-विदेशी ब्रोकरेज फर्म इसके शेयर पर बुलिश हैं। इस साल अब तक कंपनी के शेयर प्राइस में 40 प्रतिशतकी तेजी आ चुकी है।

इन वजहों से शेयरों में तेजी

HSBC ने हाल ही में 1,700 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ इसे बाय रेटिंग दी है। उसने कहा कि रिलायंस के शेयर सस्ते हैं। सेंट्रम नेरिलायंस के लिए 1,625 रुपये का टारगेट रखा है। एपिक रिसर्च के सीईओ मुस्तफा नदीम ने बताया कि दो वजहों से रिलायंस के शेयरोंमें तेजी बनी हुई है। पहली, रिलायंस जियो की ग्रोथ शानदार रही है और इसका मार्केट शेयर बढ़कर 30 प्रतिशत से अधिक हो गया है।दूसरी, अरामको को हिस्सेदारी बेचने से रिलायंस का शेयर और आकर्षक हो गया है। इससे 2021 तक कंपनी को कर्जमुक्त बनाने मेंमदद मिलेगी।