मां भेजती थी मस्जिद तो कब्रिस्तान पहुंच जाते थे कादर खान, घंटों बैठकर चिल्लाते थे

NEW DELHI: हरफनमौला कादर खान बेशक अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन आज भी अपनी 300 फिल्मों की बदौलत सभी के दिलों में हमेशा याद रहेंगे। कादर खान पिछले कई समय से बीमार चल रहे थे। एक्टर का इलाज कनाडा के अस्पताल में चला रहा था। पिछले काफी दिनों से उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो पा रहा था। एक्टर का अंतिम संस्कार कनाडा में ही होगा। कादर खान की अपनी जिंदगी में हर उपलब्धि हासिल की। उन्होंने इंडस्ट्री में ना केवल एक्टर बल्कि डायरेक्टर, डायलॉग राइटर और टीचर के तौर पर भी काम किया था। बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि कादर खान को मस्जिद जाना बिल्कुल पसंद नहीं था।

कादर खान के तीन  बड़े भाई थे लेकिन धीरे-धीरे सभी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। कादर और उनका परिवार इस हादसे के बाद मुंबई आ गया। फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले कादर खान बहुत ही गरीब घर से ताल्लुक रखते थे। उनका बचपन झुग्गी झोपड़ियों में बीता था…कहा जाता है कि कादर खान के पास पहनने के लिए चप्पल भी नहीं हुआ करती थीं। एक्टर की मां उन्हें पढ़ने के लिए मस्जिद भेजती थी लेकिन वो मस्जिद में ना जाकर कब्रिस्तान में जाकर बैठ जाया करते थे और अकेले ही जोर जोर से चिल्लाने लगते थे। जब वो कब्रिस्तान से वापस लौटते थे तो उनके मां पहचान लेती थी कि वो मस्जिद नहीं बल्कि कब्रिस्तान गये थे। कादर खान ने अपने पहले ही ड्रामें में ऐसी दमदार एक्टिंग की थी कि हर कोई हैरान रह गया था। इसके लिए एक बुजुर्ग ने उन्हें इनाम के तौर पर 100 रुपये दिए थे। जिन्हें उन्होंने कभी खर्च नहीं किया।

कादर खान के कब्रिस्तान में बैठने की बात किसी तरफ एक्टर अशरफ खान को पता चल गयी। जिसके बाद उन्होंने एक नाटक में एक्टर को रोल दिया..। अशरफ ऐसे ही एक लड़के की तलाश में थे। कादर खान के टैलेंट को सबसे पहले दिलीप कुमार ने पहचाना था। उन्होंने एक स्टेज प्ले के दौरान कादर को देखा था जिसके बाद उन्होंने फिल्म नगीना के लिए उन्हें साइन किया था। लेजेंड्री एक्टर कादर खान अब इस दुनिया में नहीं रहे..लेकिन हमेशा हमारें दिलों मे जिंदा जरुर रहेंगे।

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