फ्रूट चांट बेचकर बेटा-बेटी को बना दिया कामयाब, सलाम है ऐसे मां-बाप को

New Delhi : मां बाप बच्चों को सफल बनाने के लिए क्या क्या नहीं करते। आज हम आपको ऐसे मां- बाप की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को कामयाब बना दिया। राजस्थान से 25 साल पहले इंदौर आईं भूरी बाई धाकड़ और उनके पति नाथूलाल ने अपने बच्चों को कड़ी मेहनत करके पाला और आज दोनों बच्चे सफल हैं।

भूरी बाई बताती हैं 25 साल पहले वह नौ माह की बेटी ममता और ढाई साल के बेटे हेमराज को गोद में लिए पति के साथ इंदौर एक जोड़ी कपड़े में आई थी। यहां न तो रहने के लिए घर था न खाने के लिए रोटी। पति और मैंने एक रेस्तरां में काम किया।

बच्चे बड़े हुए तो उनकी पढ़ाई के लिए पति ने स्वीट्स की दुकान में मिठाई बनाने की नौकरी की। बच्चों की फीस का इंतजाम करने के लिए मैंने 100 रुपए में हजार रोटियां भी बेली। फ्रूट चाट बेचा। इस तरह संघर्ष कर बच्चों को 12वीं तक पढ़ाया।

ममता और हेमराज ने एसएससी (स्टाफ सेलेक्शन कमीशन) की परीक्षा पास की। अब हेमराज गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के तमिलनाडु स्थित एक अस्पताल में मेडिकल अटेंडेंट है तो बेटी ममता गुजरात में अहमदाबाद के केंद्रीय मेडिकल अस्पताल में लेडी मेडिकल अटेंडेंट है। माता-पिता के संघर्ष की कहानी जानकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कई बड़े अधिकारी भूरीबाई और नाथूलाल को फोन कर कहते हैं आपकी मेहनत रंग लाई है।

भूरीबाई फ्रूट चाट खाने आने वाले युवाओं को भी अपने बच्चों की मेहनत का हवाला देकर अच्छे से पढ़ने-लिखने और माता-पिता के सपनों को साकार करने की समझाइश देती हैं। आज भूरी बाई को फ्रूट वाली आंटी के नाम से स्कूल-कॉलेज के कई बच्चे जानते हैं और उनके बच्चों की तर्ज पर मेहनत कर कुछ बनने की बात करते हैं।