मोहम्मद कैफ ने अयोध्या फैसले का किया स्वागत, कहा- ऐसा केवल भारत में ही हो सकता है

New Delhi: राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। कोर्ट ने वि’वादित जमीन पर रामलला के हक में फैसला सुनाया। इस पर भारत के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने शनिवार को अयोध्या के फैसले का स्वागत किया और कहा कि ‘भारत की संकल्पना किसी भी विचारधारा से बहुत बड़ी है। कैफ के ट्वीट की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है।

ट्विटर पर कैफ ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों अब्दुल नजीर और केके मुहम्मद की सराहना की।

कैफ ने ट्वीट किया, ‘ऐसा केवल भारत में ही हो सकता है। जहां एक जस्टिस अब्‍दुल नजीर सर्वसम्‍मति से लिए फैसले में शामिल थे. और एक केके मोहम्‍मद ने ऐतिहासिक दस्‍तावेज दिए। भारत की संकल्‍पना सबको शामिल करने वाली विचारधारा से बड़ी है। सभी खुश रहें, मैं शांति, प्रेम और सद्भाव की दुआ करता हूं।’

बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने शनिवार को इस मामले में फैसला सुनाया। 5 न्यायाधीशों की बेंच ने 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल थे। फैसले में कहा गया कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि राम लल्ला को सौंप दी जाए और मंदिर निर्माण के लिए केंद्र को तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट स्थापित करने का निर्देश दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही अलग जगह देने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को दावे को भी खा’रिज कर दिया।

ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधि भी रहेगा। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में असफल रहा है। कोर्ट के मुताबिक आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में कही बात को मानते हुए कहा, बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था। विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू राम चबूतरा और सीता रसोई की पूजा करते थे।

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