दिन-दहाड़े, बीच रोड पर हुआ था पहलू खान का कत्ल… लेकिन कातिल कोई नहीं, 6 आरोपी बरी

NEW DELHI: पहलू खान मॉब लिंचिंग केस में अलवर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। सरकारी वकील ने कहा है कि इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे। कहा जा रहा है कि इस मामले में सरकारी पक्ष अदालत में सबूतों को साबित करने में नाकाम रहा, वहीं कुछ गवाह भी पलट गए।

कोर्ट ने घटनास्थल के वीडियो को ऐडमिसेबल सुबूत नहीं माना है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पुलिस ने वीडियो की एफएसएल जांच नहीं करवाई है। ऐसे में वीडियो को सुबूत के तौर पर नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह कहा कि वीडियो बनाने वाले शख्स ने वीडियो बनाने के बारे में सही-सही जानकारी नहीं दी और वीडियो में किसी की शक्ल नहीं दिखाई दे रही है।

पूरी दुनिया ने देखा कि पहलू खान को एक दर्दनाक मौत मिली। कोई भी इंसान ऐसी मौत के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकता। हरियाणा के मेवात की नूह तहसील में रहने वाले पहलू खान डेयरी चलाते थे। उनके काम में दूध की ज्यादा खपत थी। एक बार ज्यादा दूध के लालच में पहलू खान ने एक गाय का सौदा कर लिया। बस वही गाय उनकी मौत का कारण बन गई।

1 अप्रैल 2017 को पहलू खान अपने आखिरी सफर पर निकले थे। मेवात के नूह कस्बे में रहने वाले पहलू खान भैंस खरीदने के लिए जयपुर पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक गाय खरीद ली। गाय लेकर अपने घर लौट रहे थे, तो अलवर जिले की बहरोड़ पुलिया के पास कुछ अतिवादी संगठनों के लोगों ने उन्हें घेर लिया। तस्कर समझकर उन पर हमला किया। पहलू खान को बुरी तरह मारा। इस हमले में पहलू खान के दो बेटे और अन्य दो लोग घायल हो गए थे।

कुछ लोग वहां खड़े होकर घटना का वीडियो बना रहे थे। इस दौरान लोग तमाशा देखते रहे और आरोपी पहलू खान को पीटते रहे। वह मदद के लिए चिल्लाते रहे लेकिन किसी ने मदद नहीं की। कुछ देर बाद पहुंची पुलिस पहुंची तो भीड़ को मौके से हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। पहलू खान की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उन्हें अस्पताल में भार्ती कराया गया जहां 3 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

इस केस में वायरल वीडियो और जांच के आधार पर पुलिस 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मगर उस वक्त सत्ताधारी दल के प्रभाव में आरोपियों को पुलिस ने थाने से ही छोड़ दिया था।