हवा सी रफ्तार थी फिर भी हार गए मिल्खा सिंह, 1960 रोम ओलंपिक की वो कभी ना भूलने वाली रेस

New Delhi : तू है आग मिल्खा तू भाग मिल्खा और जिंदा है तो प्याला पूरा भर दे…… ये भाग मिल्खा भाग के वो गाने हैं जिन्हें सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। फिल्म में मिल्खा सिंह के जीवन के हर पहलू को छुआ है। मगर उस रेस की सच्चाई को थोड़ा ज्यादा नाटकीय बना दिया था। उसकी हार के पीछे की हकीकत कुछ और थी, आज भी वो तारीख मिल्खा सिंह को डराती है। उनके जन्मदिन पर आज उनके सबसे बड़े डर को जानेंगे।

1960 रोम ओलंपिक्स 6 सितंबर का वो दिन। 400 मीटर की रेस के लिए खिलाड़ी मैदान में तैनात थे। फाइनल मुकाबला शुरू होने वाला था और पूरा स्टेडियम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। 200 मीटर की रेस में उनके पांव मानो जमीन पर टिक ही नहीं रहे थे। हवा में तैर रहे थे उनके पांव और यूं लगा जैसे उड़ रहे हो मिल्खा। मगर ये रेस 400 मीटर की सबसे अहम रेस थी वही रेस जिसमें 200 मीटर तक वो सबसे आगे थे लोगों को लगा कि इस बार ओलंपिक गोल्ड तो भारत का ही है। वो भागे जा रहे थे और तभी……

और वो हार गए, वो सबसे आगे होने के बावजूद पिछड़ गए
और वो हार गए, वो सबसे आगे होने के बावजूद पिछड़ गए

आगे की कहानी तो हर घर में सुनी ही होगी। मिल्खा सिंह की हार को याद करके ये शेर दिमाग में घूमने लगता है, इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ” ऐ बेखबर ”शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं। वे रेस में धीमे हो गए और कांस्य पदक से भी हाथ धो बैठे। बस उस दौर से उनकी इस हार के चर्चे हर तरफ होने लगे। महज चंद सेकंड्स और मिल्खा को हमेशा इसका अफसोस रहा।

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हर किसी को मिल्खा सिंह पर भरोसा था वो दिन, वो वक्त आज भी यादों में ज्यों का त्यों है। पूरी दुनिया कहती थी कि मिल्खा जीतेगा। मिल्खा को भी यही लगता था क्योंकि ऐसा कोई मंच नहीं था जहां उन्होंने उड़ान नहीं भरी थी। लंदन, पेरिस, यूएसए और रूस सारे जहां में बस उनका जलवा था। बस रेस में पिछड़ने के बाद कॉन्फिडेंस की ऐसी की तैसी हो गई।

असल कहानी बताते हुए मिल्खा कहते हैं कि वो सबसे आगे दौड़ रहे थे मगर उन्हें भ्रम होने लगा कि कहीं वो पिछड़ तो नहीं रहे। लेन में ऐसी जगह पर थे कि पीछे वाले रनर्स दिखाई नहीं दे रहे थे। तो स्पीड कम कर दी। रेस का एक ही रूल है कि अगर आप ने स्पीड कम कर दी तो दोबारा वो पेस मेनटेन करना मुश्किल हो जाता है। वो लोग मिल्खा को देख पा रहे थे और उन्हें ओवरटेक करने में भी कामयाब हो गए। आज भी सीने में जिंदा हैं वो हार की यादें।

ऐसे में मिल्खा सिंह को आने वाली जनरेशन से बहुत उम्मीदें हैं। बस एक ही सपना है कि भारत ओलंपिक में गोल्ड जीते और जब पोडियम पर खिलाड़ी खड़ा हो तो पीछे भारत का राष्ट्रीय गान बजे। 2020 टोक्यो ओलंपिक से उन्हें बहुत उम्मीदें हैं।