बिना स्कूली शिक्षा के फर्राटे से बोलता है 8 विदेशी भाषाएं, मां ने खोमचे पर सामान बेच हीरा गढ़ा

New Delhi : आप कभी मध्यप्रदेश के ग्वालियर किले में घूमने जाएं तो आपको 15 साल के कालू टूरिस्ट से जरूर मिलना चाहिए। उससे मिलकर आपको अंदाजा होगा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। 15 साल का ये लड़का आपको ग्वालियर और यहां के दूसरे किलों में विदेशी सैलानियों को 4 से भी ज्यादा भाषाओं में गाइड करता दिख जाएगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि कालू ने टूरिस्ट गाइड की ट्रेनिंग तो क्या वो कभी स्कूल तक नहीं गया। परिवार में गरीबी के बोझ ने उसके रास्ते स्कूल की तरफ मोड़ने के बजाए काम की तरफ मोड़ दिए। यहां घूमने आने वाले लोग जब इस लड़के को फर्राटेदार अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश और बाकी विदेशी भाषाओं में बोलता देखते हैं तो दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।

वैसे तो कालू स्कूल न जाने के कारण अनपढ़ है लेकिन अच्छे खासे पढ़े लिखे उसके भाषा ज्ञान के आगे फेल हैं। न सिर्फ बोलना बल्कि हर भाषा को बोलते वक्त उसके लहजे यानी एक्सेंट का भी ध्यान रखना यही बात कालू को खास बनाती है। उसे बोलता देख कोई यकीन नहीं कर पाता कि उसने टूरिस्ट की कहीं से ट्रेनिंग नहीं ली है बस घर के हालातों ने उसे कम उम्र में ही ये काम सोंप दिया। कालू विदेश से आने वाले सैलानियों को भारत की संस्कृति और ग्वालियर की धरोहर के बारे में विस्तार से जानकारी देता है। कालू की मां वहीं सड़क किनारे एक खोके पर छोटे-मोटे सामान को बेचकर गुजारे लायक पैसे कमाती है। आज कालू पूरे ग्वालियर में तो फेमस है ही पूरा देश भी उसकी प्रतिभा को सलाम कर चुका है।
एक दिन ऐसे ही किसी भारतीय टूरिस्ट ने उनके काम करते हुए अच्छा सा वीडियो बनाया और अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर डाल दिया। कुछ दिनों में ही कालू पूरे देश में वायरल हो गया। लेकिन आखिर में सवाल ये आता है कि कालू ने ये सारी भाषाएं और इनके एक्सेंट सीखे कहां से और यही नहीं बिना पढ़े लिखे उन्हें इतिहास इतने बड़े इतिहास की जानकारी आखिर कैसे मिली। इस बारे में कालू का कहना है कि शुरूआती दिनों में वो अपने दोस्तों के साथ किले और बाकी टूरिस्ट प्लेसेस में खेलने के लिए जाया करते थे। इसी दौरान वो ऐसे लोगों को देखते जो अलग ही भाषा में बात करते थे। उन्हें ये देखने में मजा आता था। वो खेल से टाइम निकालकर अक्सर यही बाते सुनने में समय गुजार देते।

वो अपना पूरा दिन किले में ही घूमते हुए बिताते। इस दौरान ही उन्होंने अंग्रेजी भाषा के कई शब्द और वाक्य सीख लिये। जो समझ में नहीं आता तो टूरिस्ट से मदद लेते और बार बार टूरिस्ट और गाइड के बीच वार्तालाप को सुनते। ऐसा करते-करते वो एक दिन अंग्रेजी और फिर दूसरी भाषाओं में धीरे धीरे और फिर बाद में फर्राटेदार लहजे में बोलना सीख गए।

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