विनिर्माण उद्योगोंं का हाल-बे‘हाल- ग्रोथ रेट चार महीनों के निचले स्तर पर

New Delhi: भारत की अर्थव्यवस्था इस समय अपने खराब दौर से गुजर रही है। शुक्रवार को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों से पता चला कि औद्योगिक उत्पादन की विकास दर चार महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई है जो कि जून महीने में 2 प्रतिशत थी। इसकी वजह माइनिंग और विनिर्माण क्षेत्र का ख’राब प्रदर्शन रहा। हालांकि बीते साल के जून महीने से इसमें 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

इससे पहले जो सबसे कम बढ़त दर्ज की गई थी वो इस साल के फरवरी महीने में की गई थी जो कि 0.2 प्रतिशत थी। तब से ये दर मार्च महीने में बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गई, वहीं अप्रैल में 4.3 प्रतिशत हो गई वहीं मई महीने में 4.6 प्रतिशत थी। विनिर्माण क्षेत्र में इस बार भारी मंदी देखी गई, इस साल जून महीने में 1.2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई जो कि बीते साल 6.9 प्रतिशत थी। पूंजीगत वस्तुएं(जिनकी खरीद कोई भी संस्था प्रोडक्शन के लिए एक बार करती है) के उत्पादन में भी इस साल 6.5 प्रतिशत की बढ़त देखी वहीं पिछले साल ये 9.7 प्रतिशत थी, इससे निवेश की स्थिति का पता चलता है। खनन सेक्टर में जून महीने में 1.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई वहीं बीते साल इसी महीने में ये 6.5 प्रतिशत थी।
बिजली उत्पादन इस बार 8.2 प्रतिशत की बढ़त पर रहा जो कि बीते साल 8.5 प्रतिशत था, इस तरह इसमें भी थोड़ी कमी देखी गई।

अगर उद्योग के बारे में बात करें तो बीते साल के जून महीने से इस बार 23 उद्योगों में केवल 8 औद्योगिक उत्पादन क्षेत्रों में बढ़त देखी गई। बेसिल मेटल के उत्पादन में सबसे ज्यादा बढ़त देखी गई जो कि 17.7 प्रतिशत रही, इसके बाद खाने-पीने की चीजों में 16.5 प्रतिशत की बढ़त हुई और उसके बाद तंबाकू क्षेत्र के उत्पादन में 10.3 की बढ़त हुई।

वहीं जिन औद्योगिक उत्पादन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई उनमें पहले नंबर पर कागज और कागज के बनने वाले सामान का नंबर आता है जिसमें 19.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद फर्नीचर के उत्पादन में 14.3 प्रतिशत की गिरावट रही वहीं इसके बाद मोटर वाहन, ट्रेलर, सेमी-ट्रेलरस का नंबर आता है जिसमें 13.9 प्रतिशत की गिरावट आई।