असम, बिहार, राजस्थान, यूपी में कुपोषण का क’हर सबसे ज्यादा, सरकार को उठाने होंगे सख्त कदम

New Delhi: कुपोषण आज भी भारत के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। खासतौर से छोटे बच्चों पर इसका क’हर सबसे ज्यादा होता है। Lancet Child & Adoloscent Health द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और असम कुपोषण का स्तर सबसे ज्यादा है, हालांकि रोगों की संख्या और मौ’तों में काफी कमी आई है।

कुपोषण से होने वाली बीमारियों की वजह कम पौष्टिक भोजन का सेवन करना है। इस अध्ययन के लिए 1990 से लेकर माता और बच्चे के कुपोषण की वजह से बीमारियों का अध्ययन किया गया। कुपोषण के सबसे बड़े संकेतों में से एक है जन्म के समय कम वजन जिससे आगे चलकर बच्चे का कद नहीं बढ़ पाता या फिर वो कम वजन वाला रह जाता है।

इस अध्ययन से इस बात का पता चला कि राजस्थान, यूपी, बिहार और असम में कुपोषण की वजह से बीमारियों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है वहीं केरला और तमिलनाडु में ये सबसे कम है।

इससे इस बात का साफ पता चलता है कि राज्यों के बीच ही कुपोषण को लेकर कितना ज्यादा अंतर है इस तरह से कुपोषण से निपटने के लिए हर राज्य को इसी आधार पर नीति बनाने की भी जरूरत होगी। तभी वो समस्या को जड़ से खत्म कर पाएंगे।

जन्म के समय कम वजन की वजह से भारत में आज भी सबसे ज्यादा मौ’तें होती है इसलिए नीति बनाते समय इस पर सरकार को खास ध्यान देने की जरूरत है और सबसे बुरी बात ये है कि इस स्थिति में गिरावट की दर बहुत ही कम है। इस अध्ययन से एक और बहुत ही हैरान करने वाली बात का पता चला कि भारत के राज्यों में अधिक वजन की समस्या तेजी के साथ बढ़ रही है।

1990 से लेकर 2017 में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की वजह से मौ’तों में दो तिहाई की गिरावट आई है। हालांकि अभी भी ये 5 साल से कम उम्र के बच्चों में ये 68 प्रतिशत मौ’तों के लिए जिम्मेदार है।