महंत नरेंद्र गिरी बोले- भारत और हिंदुओं के खिलाफ ज’हर उगलते हैं ओवैसी

New Delhi: अयोध्या वि’वाद मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। इस पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा था कि हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। इस बयान से संत समाज में उबाल बना हुआ है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने उन पर व्यंग्य क’सते हुए कहा कि अगर ओवैसी को भारत में अच्छा नहीं लगता है तो उन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

महंत गिरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानना राष्ट्रद्रो’ह है। वह भारत और हिंदुओं के खिलाफ ज’हर उगलते रहते हैं। महंत ने चेतावनी देते हुए कहा कि ओवैसी हमेशा ही हिंदुओं और साधु- संतों के खि’लाफ रहे हैं। उनका अप’मान करते आए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यदि उनको भारत में रहना है तो भारत के संविधान और न्यायपालिका के आदेश का पालन करना होगा। वह अगर भारत में रहकर भारत के ही खि’लाफ इस तरह बयानबाजी करेंगे तो संत समाज और अखाड़ा परिषद चुपचाप सुनेगा नहीं बल्कि मुंहतो’ड़ जवाब देगा।

महंत गिरी ने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। ऐसे में अगर मंदिर बनाने में जबरदस्ती करते तो सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ता।

बता दें कि ओवैसी ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने के कोर्ट के फैसले को यह कहकर मानने से मना कर दिया कि हम खैरात की जमीन नहीं ले सकते।

ओवैसी ने कहा कि यह कानून के खि’लाफ है। ऐसा नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट से कोई गलती नहीं हो सकती है। हमें हिंदुस्तान के संविधान पर पूरा भरोसा है। हम अपने हक के लिए ल’ड़ रहे थे। 5 एकड़ जमीन की खैरात की जरूरत नहीं है। मुस्लिम गरीब हैं लेकिन मस्जिद के लिए पैसा इकट्ठा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का नागरिक होने के नाते मेरा अधिकार है कि मैं कोर्ट के फैसले से असंतुष्टि जताऊं। क्या हमें इस देश मे बोलने का आजादी नहीं है। मुल्क हिंदू राष्ट्र के रास्ते पर जा रहा है। संघ इसे अयोध्या से शुरू करेगी। ओवैसी ने कहा कि मैं अपने खुद के घर का सौदा तो कर सकता हूं लेकिन मस्जिद की जमीन का नहीं।

वहीं ओवैसी ने कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, कांग्रेस ने अपने असली रंग दिखाए हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी के धो’खेबाज और पाखं’डियों के लिए, 1949 में मूर्तियों को नहीं रखा गया होगा, राजीव गांधी द्वारा ताले नहीं खोले गए थे जहां अब भी मस्जिद होगी।

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