बिहार: दरभंगा में बाढ़ में फंसे लोगों का दावा- अभी तक सरकार से नहीं मिली कोई मदद

NEW DELHI: बिहार में बाढ़ का क’हर रोज बढ़ता ही जा रहा है। विभिन्न जिलों में इस क’हर को झेेल रहे लोगों को अब भी प्रशासन से मदद के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। Darbhanga में कुछ लोगों ने मीडिया से बात कर ये जानकारी दी है।

दरभंगा के एक गाँव के लोगों को बारिश के बाद क्षेत्र में बाढ़ के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है -“एक सप्ताह से ज्यादा का समय हो गया है, अब हमारे घरों में बाढ़ आ गई है। हम रेलवे ट्रैक के पास रहने के लिए मजबूर हैं। सरकार की तरफ से मदद मिलने के आसार हैं, अभी तक कोई मददनहीं मिली है।’

बिहार में बाढ़ का कहर , मंत्री जी बोले यह समस्या बिहार में पैदा नहीं हुई इसका कारण नेपाल है

बिहार हर साल बाढ़ और सूखे से जूझता है। इसी के चलते राजद नेता तेजस्वी यादव केंद्र सरकार से इन प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए10,000 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूर करने का आग्रह किया है। इस बार बिहार में बाढ़ का कारण नेपाल में हुई भारी बारिश है। 11-12 जुलाई को, नेपाल के सिमारा में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। 13 जुलाई तक कुल 478.40 मिमी स्पैल हुआ। अगले दिन कोसी बैराज के सभी 56 स्लुइस गेट खोले गए। जिससे बिहार की ओर तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

बिहार राज्य आपदा के उपाध्यक्ष व्यास ने कहा कि बिहार में भी भारी वर्षा हुई। जिससे कोसी, बागमती, कामका बलान, गंडक, बूढ़ी गंडक और उनकी सहायक नदियों में जल स्तर में अचानक वृद्धि हुई। प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA)  के अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ से 12 जिलों के 77 ब्लॉकों की 546 पंचायतों के 2.5 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

बिहार में बाढ़ के प्रकोप की कुछ ऐसी तस्वीरें आयी हैं कि वह प्रशासन के दावों का पोल खोलने के लिए काफी है। यहां बाढ़ की विभीषिका के बीच भूख से पीड़ित लोग चूहा खाने के लिए मजबूर हैं। इस पूरे मामले पर कुछ दिन पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्र की भाजपा और बिहार की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। लालू ने ट्वीट कर लिखा है कि – “5 ट्रिल्यन डॉलर के रामराज्य में डबल इंजन वाली बिहार सरकार मे लोग सरकार की नाकामियों,कुप्रबंधन व तटबंध निर्माण एवं रखरखाव में भ्रष्टाचार के चलते बाढ़ की विभीषिका झेलते है और ऊपर से बचाव व राहत कार्यों मे सुशासनी घोटालों के चलते चूहा खाने को मजबूर है। शर्मनाक”।